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Chamba News: चीड़ की पत्तियों से रोजगार का रास्ता, चंबा की निर्जला बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल
Tue, 15 Apr 2025 06:00 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Tue, 15 Apr 2025 06:00 AM IST
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चंबा। पहाड़ों की वादियों में महिलाएं घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित रहती हैं, ऐसे में चंबा की निर्जला देवी ने अपनी मेहनत, सोच और हुनर से कुछ अलग कर दिखाया है। चीड़ के पेड़ों से गिरने वाली पत्तियों को जहां अक्सर कचरे के रूप में देखा जाता है, वहीं निर्जला देवी ने उन्हीं से कटोरियां और सजावटी वस्तुएं बनाकर अपनी आजीविका का जरिया बनाया है। आज उनकी यह कला उन्हें हर महीने करीब 20,000 रुपये की आमदनी दिला रही है। इससे भी बड़ी बात यह है कि वह अब तक 50 से अधिक महिलाओं को निशुल्क प्रशिक्षण भी दे चुकी हैं ताकि वे भी आत्मनिर्भर बन सकें।
निर्जला देवी का यह सफर लगभग पांच साल पहले एक स्वयं सहायता समूह से जुड़कर शुरू हुआ था। शुरुआत में यह केवल एक शौक था, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने इसे व्यवसाय में बदलने का निश्चय किया। आज वह न केवल कटोरियां बनाती हैं, बल्कि स्थानीय उत्पादों जैसे चंबा अचार, चुख और हस्तशिल्प वस्तुओं का भी उत्पादन करती हैं।
स्थानीय मेलों में अच्छा कारोबार
निर्जला देवी ने हाल ही में अपनी स्वयं की दुकान भी खोली है। हर साल चंबा के प्रसिद्ध मिंजर मेले में अपना स्टॉल लगाती हैं, जहां उनके उत्पादों की अच्छी बिक्री होती है। उनका कहना है कि प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग करके न केवल पर्यावरण की रक्षा की जा सकती है, बल्कि रोजगार भी सृजित किया जा सकता है।
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दूसरों के लिए प्रेरणा
आज निर्जला देवी एक ऐसी मिसाल बन गई हैं, जो बताती हैं कि संसाधनों की कमी नहीं, सोच की कमी बाधा बनती है। उन्होंने न केवल अपनी पहचान बनाई, बल्कि सैकड़ों महिलाओं को यह विश्वास दिलाया कि आत्मनिर्भरता का रास्ता उनके अपने हाथ में है। उन्होंने कहा कि वह महिलाओं को निशुल्क प्रशिक्षण देती हैं।
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निर्जला देवी का यह सफर लगभग पांच साल पहले एक स्वयं सहायता समूह से जुड़कर शुरू हुआ था। शुरुआत में यह केवल एक शौक था, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने इसे व्यवसाय में बदलने का निश्चय किया। आज वह न केवल कटोरियां बनाती हैं, बल्कि स्थानीय उत्पादों जैसे चंबा अचार, चुख और हस्तशिल्प वस्तुओं का भी उत्पादन करती हैं।
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स्थानीय मेलों में अच्छा कारोबार
निर्जला देवी ने हाल ही में अपनी स्वयं की दुकान भी खोली है। हर साल चंबा के प्रसिद्ध मिंजर मेले में अपना स्टॉल लगाती हैं, जहां उनके उत्पादों की अच्छी बिक्री होती है। उनका कहना है कि प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग करके न केवल पर्यावरण की रक्षा की जा सकती है, बल्कि रोजगार भी सृजित किया जा सकता है।
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दूसरों के लिए प्रेरणा
आज निर्जला देवी एक ऐसी मिसाल बन गई हैं, जो बताती हैं कि संसाधनों की कमी नहीं, सोच की कमी बाधा बनती है। उन्होंने न केवल अपनी पहचान बनाई, बल्कि सैकड़ों महिलाओं को यह विश्वास दिलाया कि आत्मनिर्भरता का रास्ता उनके अपने हाथ में है। उन्होंने कहा कि वह महिलाओं को निशुल्क प्रशिक्षण देती हैं।