{"_id":"65e08cd4feb0d4e704050373","slug":"patients-kept-peeping-in-opd-doctor-came-after-two-and-a-half-hours-chamba-news-c-88-1-ssml1006-119446-2024-02-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chamba News: ओपीडी में झांकते रहे मरीज, ढाई घंटे बाद आए डॉक्टर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chamba News: ओपीडी में झांकते रहे मरीज, ढाई घंटे बाद आए डॉक्टर
Thu, 29 Feb 2024 07:25 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Thu, 29 Feb 2024 07:25 PM IST
विज्ञापन
ओपीडी में झांकते रहे मरीज, ढाई घंटे बाद आए डॉक्टर
चिकित्सकों की हड़ताल के चलते झेलनी पड़ीं परेशानियां, सुबह ही पहुंच गए थे अस्पताल
ओपीडी के बाहर कोई फर्श पर तो कई सीढि़यों पर बैठ कर करते रहे इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी
डलहौजी (चंबा)। सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टरों की ढाई घंटे की हड़ताल के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। नागरिक अस्पताल डलहौजी में मरीज अपने सामान से भरे बैग पीठ पर उठाकर डॉक्टर का इंतजार करते रहे। डॉक्टर ओपीडी में ढाई घंटे बाद पहुंचे। हालांकि, मरीज सुबह 9:00 बजे ही अपनी बीमारी का इलाज करवाने के लिए अस्पताल पहुंच गए थे। ओपीडी में कोई डॉक्टर नहीं था। मरीज और तीमारदार 12:00 बजने तक बार-बार ओपीडी में झांक कर देखते रहे कि शायद अब डॉक्टर आ जाएगा, लेकिन ढाई घंटे की हड़ताल के बाद 12:00 बजे डॉक्टर ओपीडी में पहुंचे। कई मरीज ओपीडी के बाहर फर्श पर बैठे रहे। कई मरीज अस्पताल परिसर में बनी सीढि़यों पर बैठकर इंतजार करते रहे।
हड़ताल के दौरान प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र समोट में एक इमरजेंसी केस आ गया। वहां डॉक्टरों ने अपनी हड़ताल को भुलाकर उस मरीज को आपातकालीन सेवा प्रदान की। मरीज को प्राथमिक उपचार देने के बाद एंबुलेंस से रेफर भी किया। इसको लेकर वहां मौजूद अन्य मरीजों ने डॉक्टरों के कार्य की सराहना भी की। डॉक्टर पहले ही इस बात को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दे चुके हैं कि वे हड़ताल अपनी मांगों को पूरा करने के लिए कर रहे हैं। आम लोगों को परेशान करना उनका मकसद नहीं है। इसलिए इमरजेंसी केस आने पर चिकित्सक उन्हें इलाज प्रमुखता के आधार पर दे रहे हैं। जिले के अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में भी डॉक्टरों के ओपीडी में नहीं होने से मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ी। मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन के महासचिव करण हितैषी ने बताया कि डॉक्टर अपनी मांगों को हड़ताल कर रहे हैं। डॉक्टरों की मांग पूरी तरह से जायज है।
--
विज्ञापन
चिकित्सकों की हड़ताल के चलते झेलनी पड़ीं परेशानियां, सुबह ही पहुंच गए थे अस्पताल
ओपीडी के बाहर कोई फर्श पर तो कई सीढि़यों पर बैठ कर करते रहे इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी
डलहौजी (चंबा)। सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टरों की ढाई घंटे की हड़ताल के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। नागरिक अस्पताल डलहौजी में मरीज अपने सामान से भरे बैग पीठ पर उठाकर डॉक्टर का इंतजार करते रहे। डॉक्टर ओपीडी में ढाई घंटे बाद पहुंचे। हालांकि, मरीज सुबह 9:00 बजे ही अपनी बीमारी का इलाज करवाने के लिए अस्पताल पहुंच गए थे। ओपीडी में कोई डॉक्टर नहीं था। मरीज और तीमारदार 12:00 बजने तक बार-बार ओपीडी में झांक कर देखते रहे कि शायद अब डॉक्टर आ जाएगा, लेकिन ढाई घंटे की हड़ताल के बाद 12:00 बजे डॉक्टर ओपीडी में पहुंचे। कई मरीज ओपीडी के बाहर फर्श पर बैठे रहे। कई मरीज अस्पताल परिसर में बनी सीढि़यों पर बैठकर इंतजार करते रहे।
हड़ताल के दौरान प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र समोट में एक इमरजेंसी केस आ गया। वहां डॉक्टरों ने अपनी हड़ताल को भुलाकर उस मरीज को आपातकालीन सेवा प्रदान की। मरीज को प्राथमिक उपचार देने के बाद एंबुलेंस से रेफर भी किया। इसको लेकर वहां मौजूद अन्य मरीजों ने डॉक्टरों के कार्य की सराहना भी की। डॉक्टर पहले ही इस बात को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दे चुके हैं कि वे हड़ताल अपनी मांगों को पूरा करने के लिए कर रहे हैं। आम लोगों को परेशान करना उनका मकसद नहीं है। इसलिए इमरजेंसी केस आने पर चिकित्सक उन्हें इलाज प्रमुखता के आधार पर दे रहे हैं। जिले के अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में भी डॉक्टरों के ओपीडी में नहीं होने से मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ी। मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन के महासचिव करण हितैषी ने बताया कि डॉक्टर अपनी मांगों को हड़ताल कर रहे हैं। डॉक्टरों की मांग पूरी तरह से जायज है।
विज्ञापन