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Chamba News: पंगवाल समुदाय ने हंसी-खुशी मनाया पुनेही उत्सव
Mon, 12 Feb 2024 10:31 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Mon, 12 Feb 2024 10:31 PM IST
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चंबा के पांगी में जुकारू उत्सव के दौरान पूजा अर्चना करने के लिए बैठे लोग।संवाद
पांगी (चंबा)। जिला चंबा के जनजातीय क्षेत्र पांगी में जुकारू उत्सव के तीसरे दिन पंगवाल समुदाय के लोगों ने पुनेही उत्सव मनाया।
पांगीवासी सुबह खेतों में एकत्रित हुए और पत्थर की शिला की पूजा-अर्चना के बाद हल चलाया गया। पांगी में 12 दिन तक अलग-अलग त्योहार मनाए जाएंगे। मान्यता के अनुसार लोग आटे के बकरे बनाकर सुबह खेत में चिह्नित स्थान पर एकजुट होते हैं। यहां धरती माता की पूजा की जाती है। पूजा के दौरान हल भी चलाया जाता है। इससे पूर्व खेतों में पत्थर की शिला की पूजा-अर्चना कर गेहूं की बिजाई की गई। मान्यता है कि 20 दिन बाद अंकुरित होने वाले गेहूं के आधार पर ही पता चलेगा कि यह वर्ष फसल के लहजे से धन्य-धान्य रहेगा या सूखे की स्थिति उत्पन्न होगी। अगर निर्धारित समय में फसल अंकुरित हो जाती है तो इसे अच्छी पैदावार का प्रतीक माना जाता है। अगर ऐसा नहीं होता है तो इसे सूखे की स्थिति बताया जाता है। पर्व के दौरान प्रतिदिन क्रमवार लोगों के घरों में धाम का आयोजन होता है। यहां लोग एक-दूसरे के घरों में जाकर विभिन्न पकवानों का आनंद उठाते हैं।
भोज के दौरान सतु, काजू, बादाम का सेवन करते हैं। कई लोग भोज में मटर-पनीर, चिकन, मटन भी बनाते हैं। पुनेही समाप्त होने के बाद देर शाम को हर गांव में घुरेई नृत्य का भी आयोजन किया जाता है। यह घुरेई नृत्य 12 दिन तक चलता है। धुरेई नृत्य के दौरान गांव वासी एकजुट होकर घर की छत पर घुरेई नृत्य करते हैं। मिंधल माता के ठाठड़ी करतार सिंह ने बताया कि इस बार पांगी वासियों पर बालिराज काफी मेहरबान हैं। कभी पांगी का जुकारू बिना बर्फ का नहीं हुआ था। इस बार बर्फ न होने के कारण क्षेत्र के लोगों में काफी मायूसी छाई थी, लेकिन जैसे ही बलि राजा का त्योहार नजदीक आया तो बर्फबारी हुई है और जमकर बर्फबारी होने से पांगी वासी खुश हैं।
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पांगीवासी सुबह खेतों में एकत्रित हुए और पत्थर की शिला की पूजा-अर्चना के बाद हल चलाया गया। पांगी में 12 दिन तक अलग-अलग त्योहार मनाए जाएंगे। मान्यता के अनुसार लोग आटे के बकरे बनाकर सुबह खेत में चिह्नित स्थान पर एकजुट होते हैं। यहां धरती माता की पूजा की जाती है। पूजा के दौरान हल भी चलाया जाता है। इससे पूर्व खेतों में पत्थर की शिला की पूजा-अर्चना कर गेहूं की बिजाई की गई। मान्यता है कि 20 दिन बाद अंकुरित होने वाले गेहूं के आधार पर ही पता चलेगा कि यह वर्ष फसल के लहजे से धन्य-धान्य रहेगा या सूखे की स्थिति उत्पन्न होगी। अगर निर्धारित समय में फसल अंकुरित हो जाती है तो इसे अच्छी पैदावार का प्रतीक माना जाता है। अगर ऐसा नहीं होता है तो इसे सूखे की स्थिति बताया जाता है। पर्व के दौरान प्रतिदिन क्रमवार लोगों के घरों में धाम का आयोजन होता है। यहां लोग एक-दूसरे के घरों में जाकर विभिन्न पकवानों का आनंद उठाते हैं।
भोज के दौरान सतु, काजू, बादाम का सेवन करते हैं। कई लोग भोज में मटर-पनीर, चिकन, मटन भी बनाते हैं। पुनेही समाप्त होने के बाद देर शाम को हर गांव में घुरेई नृत्य का भी आयोजन किया जाता है। यह घुरेई नृत्य 12 दिन तक चलता है। धुरेई नृत्य के दौरान गांव वासी एकजुट होकर घर की छत पर घुरेई नृत्य करते हैं। मिंधल माता के ठाठड़ी करतार सिंह ने बताया कि इस बार पांगी वासियों पर बालिराज काफी मेहरबान हैं। कभी पांगी का जुकारू बिना बर्फ का नहीं हुआ था। इस बार बर्फ न होने के कारण क्षेत्र के लोगों में काफी मायूसी छाई थी, लेकिन जैसे ही बलि राजा का त्योहार नजदीक आया तो बर्फबारी हुई है और जमकर बर्फबारी होने से पांगी वासी खुश हैं।
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