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Chamba News: डॉक्टर के राउंड के दौरान मरीज के साथ एक तीमारदार को मिले रहने की अनुमति
Sun, 06 Jul 2025 05:09 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sun, 06 Jul 2025 05:09 AM IST
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मेडिकल कॉलेज चंबा। स्त्रोत- जागरूक पाठक
मरीज के साथ तीमारदार न होने से गंभीर मरीज नहीं बता पाते अपनी परेशानी
पांच विस क्षेत्रों की पौने छह लाख की आबादी मेडिकल कॉलेज चंबा पर निर्भर
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। मेडिकल कॉलेज चंबा में उपचाराधीन मरीजों के तीमारदारों ने मांग की है कि चिकित्सीय राउंड के दौरान मरीज के साथ एक व्यक्ति को रहने की अनुमति दी जाए। तीमारदार साथ न होने के कारण उपचाराधीन मरीज डाॅक्टर को अपनी परेशानी खुलकर नहीं बता पाते हैं।
तीमारदारों का तर्क है कि मरीज की हालत खराब होने पर जब वे कुछ बता नहीं पाते है तो चिकित्सक बिना कुछ जानकारी के किस प्रकार से उन्हें दवा लिख सकते हैं। ऐसे में मरीजों के साथ कम से कम एक तीमारदार का रहना जरूरी है। बावजूद इसके प्रबंधन की अव्यवस्था अब उपचाराधीन मरीजों पर भारी पड़ रही है। इतना ही नहीं, कई बार सुरक्षा कर्मियों और तीमारदारों के बीच बहसबाजी तक की नौबत पेश आ जाती है। तीमारदारों के आरोप है कि कई बार ऐसी स्थिति में सुरक्षा कर्मियों के साथ झड़प तक की नौबत आ जाती है।
परिचर्चा
मरीज की हालत खराब होने पर कई बार मरीज चिकित्सक की बात नहीं समझ पाते हैं। इस कारण चिकित्सीय राउंड के बाद तीमारदारों की मुसीबतें बढ़ जाती हैं। यही कारण है कि कई बार सुरक्षा कर्मियों की तीमारदारों के साथ झड़प तक हो जाती है। -ताजदीन खान, तीमारदार
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मेडिकल कॉलेज चंबा में मरीज के साथ एक तीमारदार को उसके साथ रुकने की इजाजत होनी चाहिए। बीमार मरीज रोता-बिलखता रहेगा तो वह किस प्रकार से चिकित्सक की राय सुनेगा और क्या ही चिकित्सक मरीज को बता पाएगा। -डॉ. डीके सोनी, समाजसेवी
मरीजों को दाखिल करने के बाद कम से कम दो तीमारदार वहां चाहिए होते हैं। ताकि, एक मरीज के साथ मौजूद रहे और दूसरा मरीज विभिन्न टेस्ट, दवाइयां खरीद कर ला सके। बावजूद इसके तीमारदारों को चिकित्सीय राउंड के दौरान बाहर का रास्ता दिखाना चिंता का विषय है। -तजवीज पठानिया, समाजसेवी
गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज के साथ देखभाल के लिए एक तीमारदार का 24 घंटे रहना अनिवार्य रहता है। ऐसे में चिकित्सीय राउंड के दौरान मरीज के साथ किसी को भी न रहने देने की बात समझ से ही परे है।-संजीव शर्मा, समाज सेवी
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एचओडी, विशेषज्ञ चिकित्सकों की राय है कि मरीज के साथ एक तीमारदार रहना चाहिए, ताकि मरीज और तीमारदार को राहत मिल सके। बताया कि गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज के साथ यदि आवश्यक है तो दो तीमारदार रह सकते हैं।- डॉ. जालम भारद्वाज चिकित्सा, अधीक्षक चंबा
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पांच विस क्षेत्रों की पौने छह लाख की आबादी मेडिकल कॉलेज चंबा पर निर्भर
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। मेडिकल कॉलेज चंबा में उपचाराधीन मरीजों के तीमारदारों ने मांग की है कि चिकित्सीय राउंड के दौरान मरीज के साथ एक व्यक्ति को रहने की अनुमति दी जाए। तीमारदार साथ न होने के कारण उपचाराधीन मरीज डाॅक्टर को अपनी परेशानी खुलकर नहीं बता पाते हैं।
तीमारदारों का तर्क है कि मरीज की हालत खराब होने पर जब वे कुछ बता नहीं पाते है तो चिकित्सक बिना कुछ जानकारी के किस प्रकार से उन्हें दवा लिख सकते हैं। ऐसे में मरीजों के साथ कम से कम एक तीमारदार का रहना जरूरी है। बावजूद इसके प्रबंधन की अव्यवस्था अब उपचाराधीन मरीजों पर भारी पड़ रही है। इतना ही नहीं, कई बार सुरक्षा कर्मियों और तीमारदारों के बीच बहसबाजी तक की नौबत पेश आ जाती है। तीमारदारों के आरोप है कि कई बार ऐसी स्थिति में सुरक्षा कर्मियों के साथ झड़प तक की नौबत आ जाती है।
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मरीज की हालत खराब होने पर कई बार मरीज चिकित्सक की बात नहीं समझ पाते हैं। इस कारण चिकित्सीय राउंड के बाद तीमारदारों की मुसीबतें बढ़ जाती हैं। यही कारण है कि कई बार सुरक्षा कर्मियों की तीमारदारों के साथ झड़प तक हो जाती है। -ताजदीन खान, तीमारदार
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मेडिकल कॉलेज चंबा में मरीज के साथ एक तीमारदार को उसके साथ रुकने की इजाजत होनी चाहिए। बीमार मरीज रोता-बिलखता रहेगा तो वह किस प्रकार से चिकित्सक की राय सुनेगा और क्या ही चिकित्सक मरीज को बता पाएगा। -डॉ. डीके सोनी, समाजसेवी
मरीजों को दाखिल करने के बाद कम से कम दो तीमारदार वहां चाहिए होते हैं। ताकि, एक मरीज के साथ मौजूद रहे और दूसरा मरीज विभिन्न टेस्ट, दवाइयां खरीद कर ला सके। बावजूद इसके तीमारदारों को चिकित्सीय राउंड के दौरान बाहर का रास्ता दिखाना चिंता का विषय है। -तजवीज पठानिया, समाजसेवी
गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज के साथ देखभाल के लिए एक तीमारदार का 24 घंटे रहना अनिवार्य रहता है। ऐसे में चिकित्सीय राउंड के दौरान मरीज के साथ किसी को भी न रहने देने की बात समझ से ही परे है।-संजीव शर्मा, समाज सेवी
एचओडी, विशेषज्ञ चिकित्सकों की राय है कि मरीज के साथ एक तीमारदार रहना चाहिए, ताकि मरीज और तीमारदार को राहत मिल सके। बताया कि गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज के साथ यदि आवश्यक है तो दो तीमारदार रह सकते हैं।- डॉ. जालम भारद्वाज चिकित्सा, अधीक्षक चंबा