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Chamba News: कभी दुनिया भर में थी पहचान, आज देहरादून की बासमती बोने से डरते हैं किसान
Thu, 07 Dec 2023 10:36 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Thu, 07 Dec 2023 10:36 PM IST
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सिहुंता (चंबा)। बेहतरीन खुशबू और पौष्टिकता के लिए दुनिया भर में पहचान बनाने वाली देहरादून के बासमती चावल की खेती से किसानों ने मुंह मोड़ लिया है।
भटियात विधानसभा क्षेत्र की कामला पंचायत के 90 फीसदी किसानों ने इसकी खेती करनी बंद कर दी है। किसानों ने इसके पीछे जंगली जानवरों और लावारिस मवेशियों के आतंक को कारण बताया है। किसानों ने कहा कि गांव में करीब दो बीघा नमी वाली जमीन भी उपलब्ध है, लेकिन सुअर, बंदर और लावारिश मवेशी फसल को तबाह कर देते हैं।
कामला पंचायत के गांवों में पैदा होने वाली देहरादून के बासमती चावल की किस्म का निर्यात भटियात के अलावा जिला चंबा और प्रदेश के विभिन्न जिलों में होता है। वर्तमान समय में किसानों ने जंगली जानवरों और लावारिस मवेशियों के डर से इसकी खेती करनी ही छोड़ दी है। वर्तमान में क्षेत्र के महज 10 प्रतिशत किसान ही देहरादून के बासमती चावल की खेती कर रहे हैं। उन्हें भी घाटा ही उठाना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि जंगली जानवरों की समस्या का न तो भटियात प्रशासन और न ही कृषि विभाग ने समाधान करने का प्रयास किया है।
कृषि उप निदेशक कुलदीप धीमान ने कहा कि सरकार सोलर फेंसिंग लगाने के लिए किसानों को 70 प्रतिशत अनुदान दे रही है। किसान खेतीबाड़ी को सुरक्षित करने के लिए सोलर फेंसिंग लगवाने के लिए पोर्टल www.agridbt.hp.gov.in के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।
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उपमंडलाधिकारी नागरिक चुवाड़ी पारस अग्रवाल ने बताया कि मामला ध्यान में है। इस बारे में संबंधित विभाग के अधिकारियों को पंचायत में जाकर किसानों को खेतीबाड़ी को बचाने के लिए प्रयास करने के बारे में निर्देश जारी किए जाएंगे।
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देहरादून की बासमती की पैदावार किसानों को मालामाल करती रही है। अब जंगली जानवरों के आतंक से कड़ी मेहनत कर उगाई गई धान की फसल की घास तक किसानों को नसीब नहीं होती है। यही कारण है कि किसानों ने धान की खेती करना ही छोड़ दिया है। - भीम सिंह, तरंगड़ा निवासी
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क्षेत्र के देहरादून की बासमती की धाक चंबा समेत प्रदेश भर में रही है। किसान धान उगाने के बाद काफी मात्रा में निर्यात भी करते रहे हैं, लेकिन विभागों की लापरवाही अब किसानों पर भारी पड़ रही है। विभागों को किसानों की मदद के लिए आगे आना चाहिए। - कुलभूषण उपमन्यु, पर्यावरण विद एवं समाजसेवी।
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चंबा रियासत के राजपरिवार के लोग विशेष तौर पर देहरादून के बासमती चावल खाते रहे हैं। अब जंगली जानवरों के आतंक ने किसानों से उनकी मेहनत ही छीन ली है। मजबूरन अब किसान खेतीबाड़ी छोड़कर दिहाड़ी लगाने के लिए विवश हैं। - बफीर्राम, सिहुंता निवासी
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नमी युक्त रहने वाली कामला पंचायत की भूमि अब जंगली जानवरों के आतंक से बंजर बनने की कगार पर है। पहले धान की खेती होने से किसान यहां पानी भरकर काम चलाते रहे हैं, लेकिन प्रशासन और विभागीय बेरुखी किसानों पर भारी पड़ती नजर आ रही है। - सुरेंद्र कुमार, कामला निवासी
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धान के लिए मशहूर कामला पंचायत के किसान विभागीय सुध न लिए जाने से अब खेतीबाड़ी करने से पीछे हट रहे हैं। प्रशासन और विभाग को जंगली जानवरों से निजात दिलवाने के लिए विशेष प्रयास करने चाहिए। - लक्ष्मण सिंह, उपप्रधान कामला
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भटियात विधानसभा क्षेत्र की कामला पंचायत के 90 फीसदी किसानों ने इसकी खेती करनी बंद कर दी है। किसानों ने इसके पीछे जंगली जानवरों और लावारिस मवेशियों के आतंक को कारण बताया है। किसानों ने कहा कि गांव में करीब दो बीघा नमी वाली जमीन भी उपलब्ध है, लेकिन सुअर, बंदर और लावारिश मवेशी फसल को तबाह कर देते हैं।
कामला पंचायत के गांवों में पैदा होने वाली देहरादून के बासमती चावल की किस्म का निर्यात भटियात के अलावा जिला चंबा और प्रदेश के विभिन्न जिलों में होता है। वर्तमान समय में किसानों ने जंगली जानवरों और लावारिस मवेशियों के डर से इसकी खेती करनी ही छोड़ दी है। वर्तमान में क्षेत्र के महज 10 प्रतिशत किसान ही देहरादून के बासमती चावल की खेती कर रहे हैं। उन्हें भी घाटा ही उठाना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि जंगली जानवरों की समस्या का न तो भटियात प्रशासन और न ही कृषि विभाग ने समाधान करने का प्रयास किया है।
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कृषि उप निदेशक कुलदीप धीमान ने कहा कि सरकार सोलर फेंसिंग लगाने के लिए किसानों को 70 प्रतिशत अनुदान दे रही है। किसान खेतीबाड़ी को सुरक्षित करने के लिए सोलर फेंसिंग लगवाने के लिए पोर्टल www.agridbt.hp.gov.in के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।
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उपमंडलाधिकारी नागरिक चुवाड़ी पारस अग्रवाल ने बताया कि मामला ध्यान में है। इस बारे में संबंधित विभाग के अधिकारियों को पंचायत में जाकर किसानों को खेतीबाड़ी को बचाने के लिए प्रयास करने के बारे में निर्देश जारी किए जाएंगे।
देहरादून की बासमती की पैदावार किसानों को मालामाल करती रही है। अब जंगली जानवरों के आतंक से कड़ी मेहनत कर उगाई गई धान की फसल की घास तक किसानों को नसीब नहीं होती है। यही कारण है कि किसानों ने धान की खेती करना ही छोड़ दिया है। - भीम सिंह, तरंगड़ा निवासी
क्षेत्र के देहरादून की बासमती की धाक चंबा समेत प्रदेश भर में रही है। किसान धान उगाने के बाद काफी मात्रा में निर्यात भी करते रहे हैं, लेकिन विभागों की लापरवाही अब किसानों पर भारी पड़ रही है। विभागों को किसानों की मदद के लिए आगे आना चाहिए। - कुलभूषण उपमन्यु, पर्यावरण विद एवं समाजसेवी।
चंबा रियासत के राजपरिवार के लोग विशेष तौर पर देहरादून के बासमती चावल खाते रहे हैं। अब जंगली जानवरों के आतंक ने किसानों से उनकी मेहनत ही छीन ली है। मजबूरन अब किसान खेतीबाड़ी छोड़कर दिहाड़ी लगाने के लिए विवश हैं। - बफीर्राम, सिहुंता निवासी
नमी युक्त रहने वाली कामला पंचायत की भूमि अब जंगली जानवरों के आतंक से बंजर बनने की कगार पर है। पहले धान की खेती होने से किसान यहां पानी भरकर काम चलाते रहे हैं, लेकिन प्रशासन और विभागीय बेरुखी किसानों पर भारी पड़ती नजर आ रही है। - सुरेंद्र कुमार, कामला निवासी
धान के लिए मशहूर कामला पंचायत के किसान विभागीय सुध न लिए जाने से अब खेतीबाड़ी करने से पीछे हट रहे हैं। प्रशासन और विभाग को जंगली जानवरों से निजात दिलवाने के लिए विशेष प्रयास करने चाहिए। - लक्ष्मण सिंह, उपप्रधान कामला