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Chamba News: मुडाह गांव आज भी सड़क से वंचित, ग्रामीण परेशान
Sun, 12 Oct 2025 06:38 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sun, 12 Oct 2025 06:38 AM IST
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सलूणी (चंबा) । विकास के दावे और सड़कों के जाल बिछाने के सरकार के दावे खोखले हैं। विकास खंड सलूणी का मुडाह गांव आज भी बुनियादी सुविधा सड़क से वंचित है।
गांव के लोगों को आज भी मुख्य सड़क से पांच किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई चढ़ पैदल घर पहुंचना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार, बरसात या सर्दी हो, धूप हो या रात हर छोटी-बड़ी जरूरत के लिए पहाड़ चढ़ना ही एकमात्र रास्ता है।
सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है जब गांव में कोई बीमार या गर्भवती महिला होती है, जिसे अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। अक्सर लोगों को चारपाई पर उठा कर ले जाना पड़ता है। मुडाह गांव की अधिकांश आबादी कृषि पर निर्भर है।
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सब्जियों का सीजन आते ही किसान खच्चरों के सहारे उत्पाद सड़क तक पहुंचाते हैं, जिससे लागत और मेहनत दोनों बढ़ जाती है।
गांव के लोगों में शक्ति सिंह, तुला राम, नरेश कुमार, महेश कुमार, रमेश कुमार, कैलाश चंद, प्रवीण कुमार, लेख राज और देस राज का कहना है कि घरों के निर्माण के लिए सीमेंट, सरिया, रेत जैसी सामग्री भी मजदूरों को पीठ पर ढोनी पड़ती है। इस क्षेत्र में करीब 500 लोग बसते हैं लेकिन आज तक गांव तक सड़क नहीं पहुंच पाई है।
कई बार सरकार और विभागों को ज्ञापन दिए गए लेकिन नतीजा सिर्फ वादों तक सीमित रहा। उधर, लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता हिमांशु वर्मा ने बताया कि क्षेत्र का सर्वे किया जाएगा और उसके आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
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गांव के लोगों को आज भी मुख्य सड़क से पांच किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई चढ़ पैदल घर पहुंचना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार, बरसात या सर्दी हो, धूप हो या रात हर छोटी-बड़ी जरूरत के लिए पहाड़ चढ़ना ही एकमात्र रास्ता है।
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सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है जब गांव में कोई बीमार या गर्भवती महिला होती है, जिसे अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। अक्सर लोगों को चारपाई पर उठा कर ले जाना पड़ता है। मुडाह गांव की अधिकांश आबादी कृषि पर निर्भर है।
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सब्जियों का सीजन आते ही किसान खच्चरों के सहारे उत्पाद सड़क तक पहुंचाते हैं, जिससे लागत और मेहनत दोनों बढ़ जाती है।
गांव के लोगों में शक्ति सिंह, तुला राम, नरेश कुमार, महेश कुमार, रमेश कुमार, कैलाश चंद, प्रवीण कुमार, लेख राज और देस राज का कहना है कि घरों के निर्माण के लिए सीमेंट, सरिया, रेत जैसी सामग्री भी मजदूरों को पीठ पर ढोनी पड़ती है। इस क्षेत्र में करीब 500 लोग बसते हैं लेकिन आज तक गांव तक सड़क नहीं पहुंच पाई है।
कई बार सरकार और विभागों को ज्ञापन दिए गए लेकिन नतीजा सिर्फ वादों तक सीमित रहा। उधर, लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता हिमांशु वर्मा ने बताया कि क्षेत्र का सर्वे किया जाएगा और उसके आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।