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Chamba News: पतंग डोर से फंसे लंबी चोंच वाले कौवे को सुरक्षित बचाया
Sun, 22 Mar 2026 10:41 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sun, 22 Mar 2026 10:41 PM IST
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पेड़ पर पतंग की डोर से फंसा कौवा। स्त्रोत विभाग।
बार-बार छटपटा कर खुद को डोर से छुड़ाने का कर रहा था प्रयास
रेस्क्यू टीम ने आग की मशाल से टहनी से अटकी डोर को निकाला
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। पतंग की डोर से फंसे लंबी चोंच वाले जंगली कौवे को वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू किया है। बारगाह के पास कौवा ऊंचे पेड़ की टहनी पर डोर के साथ फंसा था।
इससे निकलने के लिए छटपटा रहा था। डोर इतनी मजबूत थी कि वह चाहकर भी उससे नहीं निकल पा रहा था। आसपास के लोगों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी। वन रक्षक विनोद कुमार और टीम कौवे को रेस्क्यू करने के लिए पहुंची। पेड़ पर बारिश के कारण काफी फिसलन थी। इसके चलते पेड़ पर चढ़ना उनके लिए नामुमकिन था। इसके बाद उन्होंने लंबी सीढ़ी पर चढ़कर डंडे में आग की मशाल जलाई। इसे कौवे की डोर से नजदीक रखा। आग की आंच से डोर पेड़ की टहनी से निकल गई और कौवा सुरक्षित साथ लगते भवन की छत पर गिर गया। उसे रेस्क्यू टीम ने बचा लिया। इसके बाद उसके पंजों से डोर को निकालकर जंगल में छोड़ दिया गया। वन रक्षक ने बताया कि वह पिछले एक साल में 51 पक्षियों का रेस्क्यू कर चुके हैं। इतना ही नहीं, घायल पक्षियों को उपचार भी दिया जा रहा है। इसके लिए अलग कमरे की व्यवस्था विभाग ने कर रखी है।
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रेस्क्यू टीम ने आग की मशाल से टहनी से अटकी डोर को निकाला
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। पतंग की डोर से फंसे लंबी चोंच वाले जंगली कौवे को वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू किया है। बारगाह के पास कौवा ऊंचे पेड़ की टहनी पर डोर के साथ फंसा था।
इससे निकलने के लिए छटपटा रहा था। डोर इतनी मजबूत थी कि वह चाहकर भी उससे नहीं निकल पा रहा था। आसपास के लोगों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी। वन रक्षक विनोद कुमार और टीम कौवे को रेस्क्यू करने के लिए पहुंची। पेड़ पर बारिश के कारण काफी फिसलन थी। इसके चलते पेड़ पर चढ़ना उनके लिए नामुमकिन था। इसके बाद उन्होंने लंबी सीढ़ी पर चढ़कर डंडे में आग की मशाल जलाई। इसे कौवे की डोर से नजदीक रखा। आग की आंच से डोर पेड़ की टहनी से निकल गई और कौवा सुरक्षित साथ लगते भवन की छत पर गिर गया। उसे रेस्क्यू टीम ने बचा लिया। इसके बाद उसके पंजों से डोर को निकालकर जंगल में छोड़ दिया गया। वन रक्षक ने बताया कि वह पिछले एक साल में 51 पक्षियों का रेस्क्यू कर चुके हैं। इतना ही नहीं, घायल पक्षियों को उपचार भी दिया जा रहा है। इसके लिए अलग कमरे की व्यवस्था विभाग ने कर रखी है।
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