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Chamba News: करवा चौथ से सात दिन पहले उजड़ा कोमल का सुहाग
Thu, 22 Oct 2026 10:36 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Thu, 22 Oct 2026 10:36 PM IST
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मृतक चंद्रमणि कुलेठी अपनी पत्नी और बच्चे संग। फाइल फोटो।
पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखने का अरमान रह गया अधूरा, चंद्रमणि कुलेठी के निधन से परिवार में मातम
दलीपा राम
होली (चंबा)। करवा चौथ पर पति की लंबी उम्र की कामना के लिए व्रत रखने की तैयारी कर रही कोमल के अरमान त्योहार से सात दिन पहले ही बिखर गए।
चंबा जिले के होली क्षेत्र के कुलेठ गांव की कोमल के पति चंद्रमणि कुलेठी का असमय निधन हो गया। जिस त्योहार पर उन्हें अपने जीवनसाथी की सलामती के लिए पूजा करनी थी, उससे पहले ही उनका सुहाग उजड़ गया। अब करवा चौथ की खुशियों की जगह पति के बिछोह का दर्द उनके जीवन में रह गया है।
हर साल करवा चौथ सुहागिनों के लिए पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना का पर्व होता है। कोमल के लिए भी इस दिन से कई उम्मीदें जुड़ी थीं, लेकिन नियति ने उन्हें ऐसा जख्म दिया है, जिसकी भरपाई संभव नहीं। इस बार न व्रत की तैयारी होगी और न ही जीवनसाथी के साथ त्योहार मनाने की खुशियां। करवा चौथ का दिन अब उनके लिए चंद्रमणि की यादों और उनके बिना जीवन बिताने की पीड़ा लेकर आएगा।
चंद्रमणि के निधन से पूरा परिवार गहरे सदमे में है। पत्नी कोमल और पिता धर्मचंद के लिए इस दुख को सह पाना बेहद कठिन है। जिस बेटे और जीवनसाथी के साथ परिवार ने भविष्य के सपने संजोए थे, उसके अचानक चले जाने से सब कुछ बदल गया है। कोमल के सामने अब जीवनसाथी के बिना आगे बढ़ने की चुनौती है। आने वाले त्योहार और जीवन के खास मौके उन्हें चंद्रमणि की कमी का अहसास कराते रहेंगे।
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करवा चौथ से ठीक पहले परिवार पर टूटा यह दुखों का पहाड़ त्योहार की खुशियों को मातम में बदल गया है। कोमल के अधूरे अरमान और परिवार का दर्द इस हादसे से मिले उस खालीपन को बयां करते हैं, जिसे शब्दों में समेटना मुश्किल है।
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दलीपा राम
होली (चंबा)। करवा चौथ पर पति की लंबी उम्र की कामना के लिए व्रत रखने की तैयारी कर रही कोमल के अरमान त्योहार से सात दिन पहले ही बिखर गए।
चंबा जिले के होली क्षेत्र के कुलेठ गांव की कोमल के पति चंद्रमणि कुलेठी का असमय निधन हो गया। जिस त्योहार पर उन्हें अपने जीवनसाथी की सलामती के लिए पूजा करनी थी, उससे पहले ही उनका सुहाग उजड़ गया। अब करवा चौथ की खुशियों की जगह पति के बिछोह का दर्द उनके जीवन में रह गया है।
हर साल करवा चौथ सुहागिनों के लिए पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना का पर्व होता है। कोमल के लिए भी इस दिन से कई उम्मीदें जुड़ी थीं, लेकिन नियति ने उन्हें ऐसा जख्म दिया है, जिसकी भरपाई संभव नहीं। इस बार न व्रत की तैयारी होगी और न ही जीवनसाथी के साथ त्योहार मनाने की खुशियां। करवा चौथ का दिन अब उनके लिए चंद्रमणि की यादों और उनके बिना जीवन बिताने की पीड़ा लेकर आएगा।
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चंद्रमणि के निधन से पूरा परिवार गहरे सदमे में है। पत्नी कोमल और पिता धर्मचंद के लिए इस दुख को सह पाना बेहद कठिन है। जिस बेटे और जीवनसाथी के साथ परिवार ने भविष्य के सपने संजोए थे, उसके अचानक चले जाने से सब कुछ बदल गया है। कोमल के सामने अब जीवनसाथी के बिना आगे बढ़ने की चुनौती है। आने वाले त्योहार और जीवन के खास मौके उन्हें चंद्रमणि की कमी का अहसास कराते रहेंगे।
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करवा चौथ से ठीक पहले परिवार पर टूटा यह दुखों का पहाड़ त्योहार की खुशियों को मातम में बदल गया है। कोमल के अधूरे अरमान और परिवार का दर्द इस हादसे से मिले उस खालीपन को बयां करते हैं, जिसे शब्दों में समेटना मुश्किल है।