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Chamba News: पांगी में एक झटके में 95 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से बाहर, 2022 का बीपीएल से कटा नाम
Sun, 04 Jan 2026 05:45 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sun, 04 Jan 2026 05:45 AM IST
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पांगी (चंबा)। हिमाचल प्रदेश के सबसे दुर्गम और जनजातीय क्षेत्र पांगी के निवासियों को प्रदेश सरकार ने बड़ा झटका दिया है। पांगी के हजारों गरीबों को एक ही झटके में अमीरों की कतार में खड़ा कर दिया है। सरकार की ओर से जारी एक नई अधिसूचना और उसके बाद हुए सर्वे से पांगी की 19 पंचायतों में हड़कंप मच गया है।
जानकारी के अनुसार प्रशासन ने कुल 2162 बीपीएल परिवारों में से 2022 परिवारों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। अब पूरी घाटी में मात्र 140 परिवार ही बीपीएल की श्रेणी में बचे हैं। इस पूरी प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए एसडीएम पांगी की देखरेख में एक रिपोर्ट तैयार की गई। प्रदेश सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के आधार पर पांगी में बीपीएल परिवारों का दोबारा सर्वे करवाया गया। इसके लिए पंचायत स्तर पर एक कमेटी का गठन किया गया। जिसमें पंचायत सचिव, आंगनबाड़ी सदस्य और पटवारी शामिल रहे। इन कर्मचारियों ने घर-घर जाकर सर्वे किया और जो रिपोर्ट तैयार की, वह चौंकाने वाली थी। इस रिपोर्ट को बाद में खंड स्तर पर गठित बीएलसी को सौंपा गया। बीएलसी ने जब इस रिपोर्ट पर अपनी कैंची चलाई तो 2022 परिवारों के नाम बीपीएल सूची से हमेशा के लिए काट दिए गए। वहीं, अधिकारियों ने इसके पीछे के कारणों पर प्रदेश सरकार का हवाला देकर इस बात को टाल दिया है।
पांगी के लोगों में इस फैसले को लेकर भारी रोष और गुस्सा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह फैसला जमीनी हकीकत से कोसों दूर वातानुकूलित कमरों में बैठकर लिया गया है। पांगी एक ऐसा क्षेत्र है जहां साल के छह महीने बर्फ रहती है और रोजगार के साधन न के बराबर हैं। यहां के अधिकतर परिवार अपनी आजीविका के लिए मनरेगा पर निर्भर हैं। बीपीएल सूची से बाहर होने का मतलब है कि अब ये परिवार बीपीएल के तहत मिलने वाले कई लाभों से भी वंचित हो जाएंगे। लोगों का सीधा सवाल है कि सरकार ने किस आधार पर मान लिया कि पांगी के 95 प्रतिशत लोग अचानक अमीर हो गए हैं। स्थानीय लोगों ने सरकार के इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए इसे तुगलकी फरमान करार दिया है।
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एसडीएम पांगी अमनदीप ने बताया कि प्रशासन ने अपनी मर्जी से कोई फैसला नहीं लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 19 मार्च 2025 को प्रदेश सरकार की ओर से नई गाइडलाइन जारी की गई है। प्रशासन ने उसी गाइडलाइन और अधिसूचना का पालन करते हुए यह कार्रवाई की है।
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जानकारी के अनुसार प्रशासन ने कुल 2162 बीपीएल परिवारों में से 2022 परिवारों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। अब पूरी घाटी में मात्र 140 परिवार ही बीपीएल की श्रेणी में बचे हैं। इस पूरी प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए एसडीएम पांगी की देखरेख में एक रिपोर्ट तैयार की गई। प्रदेश सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के आधार पर पांगी में बीपीएल परिवारों का दोबारा सर्वे करवाया गया। इसके लिए पंचायत स्तर पर एक कमेटी का गठन किया गया। जिसमें पंचायत सचिव, आंगनबाड़ी सदस्य और पटवारी शामिल रहे। इन कर्मचारियों ने घर-घर जाकर सर्वे किया और जो रिपोर्ट तैयार की, वह चौंकाने वाली थी। इस रिपोर्ट को बाद में खंड स्तर पर गठित बीएलसी को सौंपा गया। बीएलसी ने जब इस रिपोर्ट पर अपनी कैंची चलाई तो 2022 परिवारों के नाम बीपीएल सूची से हमेशा के लिए काट दिए गए। वहीं, अधिकारियों ने इसके पीछे के कारणों पर प्रदेश सरकार का हवाला देकर इस बात को टाल दिया है।
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पांगी के लोगों में इस फैसले को लेकर भारी रोष और गुस्सा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह फैसला जमीनी हकीकत से कोसों दूर वातानुकूलित कमरों में बैठकर लिया गया है। पांगी एक ऐसा क्षेत्र है जहां साल के छह महीने बर्फ रहती है और रोजगार के साधन न के बराबर हैं। यहां के अधिकतर परिवार अपनी आजीविका के लिए मनरेगा पर निर्भर हैं। बीपीएल सूची से बाहर होने का मतलब है कि अब ये परिवार बीपीएल के तहत मिलने वाले कई लाभों से भी वंचित हो जाएंगे। लोगों का सीधा सवाल है कि सरकार ने किस आधार पर मान लिया कि पांगी के 95 प्रतिशत लोग अचानक अमीर हो गए हैं। स्थानीय लोगों ने सरकार के इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए इसे तुगलकी फरमान करार दिया है।
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एसडीएम पांगी अमनदीप ने बताया कि प्रशासन ने अपनी मर्जी से कोई फैसला नहीं लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 19 मार्च 2025 को प्रदेश सरकार की ओर से नई गाइडलाइन जारी की गई है। प्रशासन ने उसी गाइडलाइन और अधिसूचना का पालन करते हुए यह कार्रवाई की है।