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Chamba News: टेस्ट करवाना बन गया चुनौती, दिनभर भटकते रहे मरीज

Wed, 04 Nov 2026 10:28 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा Updated Wed, 04 Nov 2026 10:28 AM IST
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Getting tested has become a challenge; patients spent the entire day wandering around.
चंबा। क्रस्ना लैब के कर्मचारियों की हड़ताल का खामियाजा चंबा जिले के मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज चंबा सहित जिले के अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में दूसरे दिन मंगलवार को भी नियमित जांच व्यवस्था बहाल नहीं हो पाई।
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निशुल्क जांच सुविधा बंद होने के कारण मरीजों को निजी लैबों का रुख करना पड़ रहा है। इससे न केवल उनको भटकना पड़ा और परेशानी बढ़ी है बल्कि उपचार पर होने वाला खर्च भी बढ़ गया है।
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मेडिकल कॉलेज की सरकारी प्रयोगशाला पर मरीजों का अतिरिक्त दबाव पड़ने से व्यवस्था संभालना चुनौती बन गया है। यहां पहले प्रतिदिन करीब 150 मरीजों के टेस्ट किए जाते थे लेकिन क्रस्ना लैब की सेवाएं बंद होने के बाद यह संख्या बढ़कर 250 से अधिक हो गई है।
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सरकारी लैब में मरीजों का दबाव करीब 50 फीसदी बढ़ गया है। सीमित क्षमता वाली मशीनों के कारण लैब कर्मचारियों को शिफ्टों में नमूनों की जांच करनी पड़ रही है। सरकारी लैब में दोपहर 1 बजे तक ही मरीजों को जांच की सुविधा मिल पा रही है।
इसके बाद टेस्ट करवाने के लिए उन्हें निजी लैबों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इसका असर आपातकालीन सेवाओं के लिए पहुंचने वाले मरीजों पर भी पड़ रहा है।
मरीज ने बयां किया दर्द
निजी लैबों में टेस्ट करवाने के कारण मरीजों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। तीसा से अपनी बीमार माता का उपचार करवाने पहुंचे संजय कुमार ने बताया कि उन्हें सीबीसी, लिपिड प्रोफाइल और यूरिक एसिड के टेस्ट करवाने के लिए निजी लैब में 400 रुपये खर्च करने पड़े। वहीं, साहो से अपने बीमार पिता को लेकर पहुंचे ओम प्रकाश ने बताया कि उन्हें विभिन्न टेस्ट करवाने के लिए 600 रुपये देने पड़े। तीमारदार अशोक कुमार, चमन सिंह, देवी प्रसाद, योगराज, प्रहलाद कुमार, अमर सिंह और नरेंद्र ने कहा कि कंपनी और सरकार के बीच भुगतान को लेकर चल रहे विवाद में मरीजों की कोई गलती नहीं है, फिर भी उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। उनके अनुसार कंपनी का सरकार की ओर करीब 110 करोड़ रुपये बकाया है और भुगतान न होने तक हड़ताल जारी रखी गई है।
अस्पताल से दूर निजी लैबों तक पहुंचना भी चुनौती
मेडिकल कॉलेज में ओपीडी का समय शाम 4 बजे तक रहता है। इस दौरान चिकित्सक मरीजों की बीमारी का पता लगाने के लिए जरूरी टेस्ट लिखते हैं। पहले दोपहर बाद भी अस्पताल परिसर में स्थित क्रस्ना लैब में जांच की सुविधा उपलब्ध थी। अब हड़ताल के कारण मरीजों और तीमारदारों को निजी लैबों तक पहुंचने के लिए भटकना पड़ रहा है।
150 प्रकार के निशुल्क टेस्ट प्रभावित
क्रस्ना लैब में मरीजों के करीब 150 प्रकार के टेस्ट निशुल्क किए जाते थे। हड़ताल के कारण फिलहाल ये सेवाएं बंद हैं। सरकारी प्रयोगशाला में भी कुछ प्रकार के टेस्ट नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में मरीजों को मजबूरन निजी लैबों में जांच करवानी पड़ रही है।

शाम को सेंटर लैब में जांच की व्यवस्था
क्रस्ना लैब की हड़ताल समाप्त होने तक सरकारी प्रयोगशाला में मरीजों के टेस्ट जारी रहेंगे। इसके अतिरिक्त शाम के समय सेंटर लैब में भी मरीजों की जांच करवाने की व्यवस्था की गई है, ताकि हड़ताल के कारण प्रभावित हो रही स्वास्थ्य सेवाओं के बीच मरीजों को राहत मिल सके। डॉ. प्रदीप सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज चंबा
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