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Chamba News: प्रदेश में प्रभारी तरीके से लागू हो वन अधिकार अधिनियम
Mon, 24 Apr 2023 11:01 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Mon, 24 Apr 2023 11:01 PM IST
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जिला गुज्जर कल्याण संघ चंबा के पदाधिकारी उपायुक्त चंबा अपूर्व देवगन को ज्ञापन सौंप अपनी मांगों
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चंबा। गुज्जर कल्याण संघ ने उपायुक्त चंबा से माध्य से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर प्रदेश में वनाधिकार अधिनियम-2006 को प्रभावी तरीके से लागू करने की मांग की है। जिला गुज्जर कल्याण संघ के अध्यक्ष हसनदीन, महासचिव मुहम्मद रफी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष कासमदीन समेत लतीफ मुहम्मद, मुहम्मद युसूफ और मोहम्मद सैम ने कहा कि मुस्लिम, गुज्जर सदियों से घुमंतू पशुपालक समुदाय है। इनका पूर्ण जीवन चक्र पशुपालन पर निर्भर करता है।
यह समुदाय अपने पशुधन को लेकर निरंतर चारे की तलाश में घूमता रहता है। गर्मियों के मौसम में हिमाचल की ऊंची चोटियों पर और सर्दियों में मैदानी इलाकों में निवास करता है। बहरहाल, समुदाय का पूरा जीवनयापन वनों और वन भूमि पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि पशुपालक घुमंतू समुदाय की आजीविका का मुख्य साधन पशुपालन और दुग्ध उत्पादन है। मगर पशुपालकों को दुध, घी, पनीर का उचित दाम न मिलने और पशुचारा महंगा होने के कारण वह व्यवसाय छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा घोषित डेयरी योजना से पशुपालकों में उम्मीद बंधी है। उन्होंने पशुपालकों के व्यवसाय को जिंदा रखने के लिए उनके दुग्ध उत्पादों को उचित दाम प्रदान करने की योजना शीघ्र लागू करने की मांग उठाई है। इससे पशुपालक अपने व्यवसाय को बेहतर रोजगार के विकल्प के तौर पर स्वीकार कर पाएं।
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गुज्जर कल्याण बोर्ड का हो गठन
गुज्जर कल्याण संघ ने कहा कि अल्पसंख्यकों और घुमंतू जनजातियों की समस्याओं को जानने और उनका समाधान करने के लिए जरूरी है कि प्रदेश वक्फ बोर्ड, हज कमेटी और गुज्जर कल्याण बोर्ड का शीघ्र गठन किया जाए। प्रदेश में सबसे अधिक जनसंख्या में मुस्लिम समुदाय जिला चंबा में निवास करता है। लिहाजा, उक्त बोर्ड और कमेटियों में विशेष प्रतिनिधित्व प्रदान किया जाए।
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यह समुदाय अपने पशुधन को लेकर निरंतर चारे की तलाश में घूमता रहता है। गर्मियों के मौसम में हिमाचल की ऊंची चोटियों पर और सर्दियों में मैदानी इलाकों में निवास करता है। बहरहाल, समुदाय का पूरा जीवनयापन वनों और वन भूमि पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि पशुपालक घुमंतू समुदाय की आजीविका का मुख्य साधन पशुपालन और दुग्ध उत्पादन है। मगर पशुपालकों को दुध, घी, पनीर का उचित दाम न मिलने और पशुचारा महंगा होने के कारण वह व्यवसाय छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा घोषित डेयरी योजना से पशुपालकों में उम्मीद बंधी है। उन्होंने पशुपालकों के व्यवसाय को जिंदा रखने के लिए उनके दुग्ध उत्पादों को उचित दाम प्रदान करने की योजना शीघ्र लागू करने की मांग उठाई है। इससे पशुपालक अपने व्यवसाय को बेहतर रोजगार के विकल्प के तौर पर स्वीकार कर पाएं।
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गुज्जर कल्याण बोर्ड का हो गठन
गुज्जर कल्याण संघ ने कहा कि अल्पसंख्यकों और घुमंतू जनजातियों की समस्याओं को जानने और उनका समाधान करने के लिए जरूरी है कि प्रदेश वक्फ बोर्ड, हज कमेटी और गुज्जर कल्याण बोर्ड का शीघ्र गठन किया जाए। प्रदेश में सबसे अधिक जनसंख्या में मुस्लिम समुदाय जिला चंबा में निवास करता है। लिहाजा, उक्त बोर्ड और कमेटियों में विशेष प्रतिनिधित्व प्रदान किया जाए।