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Chamba News: महासंघ ने किया सहायक वन रक्षक भर्ती का विरोध
Sun, 19 Apr 2026 10:55 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sun, 19 Apr 2026 10:55 PM IST
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चंबा के भरमौर में बैठक के बाद हिमाचल प्रदेश वन अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के पदाधिकारी और सद
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सरकार ने इस फैसले को न लिया वापस तो प्रदेश भर में होगा उग्र आंदोलन : अविनाश
एक ही बीट में वन रक्षक, वन मित्र व सहायक वन रक्षक होने से होगा आपसी टकराव
संवाद न्यूज एजेंसी
भरमौर (चंबा)। वन अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ की भरमौर इकाई ने सहायक वन रक्षक भर्ती शुरू करने के निर्णय पर कड़ा विरोध जताया है। इसे अव्यावहारिक और विभाग के हितों के विपरीत बताया है।
महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि इस निर्णय पर तुरंत पुनर्विचार नहीं किया गया तो कर्मचारी वर्ग को आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
महासंघ के अध्यक्ष अविनाश ठाकुर ने कहा कि वन विभाग में पहले ही वन रक्षकों के सैकड़ों पद रिक्त पड़े हैं। इससे फील्ड स्तर पर कार्य प्रभावित हो रहा है। ऐसे में सहायक वन रक्षक जैसे नए पदों पर भर्ती करना न केवल संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि इससे विभागीय ढांचा और अधिक कमजोर होगा। उन्होंने कहा कि एक ही बीट में वनरक्षक, सहायक वन रक्षक और वन मित्र जैसी व्यवस्थाएं लागू करना व्यावहारिक नहीं है। इससे जिम्मेदारियों का टकराव, प्रशासनिक अव्यवस्था और कार्य निष्पादन में बाधाएं उत्पन्न होंगी। महासंघ का मानना है कि यह निर्णय जमीनी हकीकत से पूरी तरह कटे हुए दृष्टिकोण का परिणाम है। महासंघ ने मुख्यमंत्री से इस फैसले को तुरंत वापस लेने और पारंपरिक भर्ती प्रक्रिया को बहाल करने की मांग की है। चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग को नजरअंदाज किया गया तो प्रदेश भर में विरोध-प्रदर्शन और आंदोलन शुरू किया जाएगा।
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एक ही बीट में वन रक्षक, वन मित्र व सहायक वन रक्षक होने से होगा आपसी टकराव
संवाद न्यूज एजेंसी
भरमौर (चंबा)। वन अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ की भरमौर इकाई ने सहायक वन रक्षक भर्ती शुरू करने के निर्णय पर कड़ा विरोध जताया है। इसे अव्यावहारिक और विभाग के हितों के विपरीत बताया है।
महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि इस निर्णय पर तुरंत पुनर्विचार नहीं किया गया तो कर्मचारी वर्ग को आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
महासंघ के अध्यक्ष अविनाश ठाकुर ने कहा कि वन विभाग में पहले ही वन रक्षकों के सैकड़ों पद रिक्त पड़े हैं। इससे फील्ड स्तर पर कार्य प्रभावित हो रहा है। ऐसे में सहायक वन रक्षक जैसे नए पदों पर भर्ती करना न केवल संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि इससे विभागीय ढांचा और अधिक कमजोर होगा। उन्होंने कहा कि एक ही बीट में वनरक्षक, सहायक वन रक्षक और वन मित्र जैसी व्यवस्थाएं लागू करना व्यावहारिक नहीं है। इससे जिम्मेदारियों का टकराव, प्रशासनिक अव्यवस्था और कार्य निष्पादन में बाधाएं उत्पन्न होंगी। महासंघ का मानना है कि यह निर्णय जमीनी हकीकत से पूरी तरह कटे हुए दृष्टिकोण का परिणाम है। महासंघ ने मुख्यमंत्री से इस फैसले को तुरंत वापस लेने और पारंपरिक भर्ती प्रक्रिया को बहाल करने की मांग की है। चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग को नजरअंदाज किया गया तो प्रदेश भर में विरोध-प्रदर्शन और आंदोलन शुरू किया जाएगा।
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