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Chamba News: किलोड़ पंचायत के दर्जनभर गांव सड़क सुविधा से महरूम
Tue, 07 Mar 2023 10:47 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Tue, 07 Mar 2023 10:47 PM IST
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चंबा। ग्राम पंचायत किलोड़ के तहत आते दर्जन भर गांव आजादी के 75 साल बाद भी सड़क सुविधा से कोसों दूर हैं। सड़क सुविधा के अभाव में क्षेत्र के स्कूली विद्यार्थियों को आठ किलोमीटर जंगल का ऊबड़-खाबड़ रास्ता पार कर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला लिल्ह पहुंचना पड़ता है। इससे बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए सुबह सात बजे ही अपनों घरों से निकलना पड़ता है। ग्रामीणों का तर्क है कि कई बार लोक निर्माण विभाग को किलोड़ गांव को सड़क सुविधा से जोड़ने की मांग की गई है बावजूद इसके अभी तक समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों ने भरमौर-पांगी के विधायक और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से किलोड़ गांव को सड़क सुविधा से जोड़ने की मांग की है।
ग्राम पंचायत किलोड़ के लारखा, सेरी, डिबर, कलमला, लौग्रां, नागबण समेत अन्य गांवों की 2,000 आबादी सड़क सुविधा से वंचित है। सड़क के अभाव में ग्रामीणों की दुश्वारियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि चुनावों के दौरान ही गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने के वायदे किए जाते हैं लेकिन चुनाव के बाद नेता अपने वायदों को भूल जाते हैं।
ग्रामीणों मुकेश कुमार, रजिंद्र कुमार, योगराज, देवराज, तिलकराज, बॉबी शर्मा, मनीष कुमार, राजीव कुमार और संजीव कुमार का कहना है कि गांवों में अगर कोई व्यक्ति बीमार हो जाए या फिर कोई गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाना हो तो उन्हें पालकी में उठाकर जंगल के रास्ते से होकर सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। इसके बाद ही एंबुलेंस या निजी वाहन के जरिये उन्हें अस्पताल तक पहुंचाया जाता है।
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लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता ठाकुर सिंह ने बताया कि क्षेत्र के कुछेक गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ा जा रहा है। शेष ग्रामीण यदि अपनी जमीन विभाग के नाम करते हैं तो उनके गांवों को भी सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए प्रयास किए जाएंगे।
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ग्राम पंचायत किलोड़ के लारखा, सेरी, डिबर, कलमला, लौग्रां, नागबण समेत अन्य गांवों की 2,000 आबादी सड़क सुविधा से वंचित है। सड़क के अभाव में ग्रामीणों की दुश्वारियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि चुनावों के दौरान ही गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने के वायदे किए जाते हैं लेकिन चुनाव के बाद नेता अपने वायदों को भूल जाते हैं।
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ग्रामीणों मुकेश कुमार, रजिंद्र कुमार, योगराज, देवराज, तिलकराज, बॉबी शर्मा, मनीष कुमार, राजीव कुमार और संजीव कुमार का कहना है कि गांवों में अगर कोई व्यक्ति बीमार हो जाए या फिर कोई गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाना हो तो उन्हें पालकी में उठाकर जंगल के रास्ते से होकर सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। इसके बाद ही एंबुलेंस या निजी वाहन के जरिये उन्हें अस्पताल तक पहुंचाया जाता है।
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लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता ठाकुर सिंह ने बताया कि क्षेत्र के कुछेक गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ा जा रहा है। शेष ग्रामीण यदि अपनी जमीन विभाग के नाम करते हैं तो उनके गांवों को भी सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए प्रयास किए जाएंगे।