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ब्रह्मज्ञान से होती है भक्ति की शुरुआत : डॉ. राजेंद्र
Sun, 04 Aug 2024 04:32 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sun, 04 Aug 2024 04:32 PM IST
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ब्रह्मज्ञान से होती है भक्ति की शुरुआत : डॉ. राजेंद्र
चंबा। संत निरंकारी सत्संग भवन मुगला में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता महात्मा डॉ. राजेंद्र ने की। सत्संग का शुभारंभ आरती वंदना से किया गया।
इस मौके पर दूरदराज के गांवों और कस्बों से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। महात्मा डॉ. राजेंद्र ने अपने सार गर्भित प्रवचनों से साध-संगत को भाव विभौर किया। कहा कि एक जिज्ञासु के जीवन में भक्ति की शुरुआत ही ब्रह्मज्ञान के बाद होती है। जब सद्गुरु की कृपा से जिज्ञासु को ब्रह्म ज्ञान हासिल हो जाता है तो उसके जीवन में भक्ति की शुरुआत वहीं से आरंभ हो जाती है। फिर भक्ति और मजबूत करने के लिए विश्वास की बात आती है। इसके लिए एक बहुत सरल तरीका है कि नित्यप्रति संतों का संग करें। सत्संग में आकर अच्छे गुणों को श्रवण करें और अपनी आध्यात्मिक जड़ों को और मजबूत करें। मन का रिश्ता इस परमात्मा के साथ सुमरिन से और पक्का करें। सत्संग के समापन पर भंडारे का आयोजन किया गया। यह जानकारी सेवादार विनोद कुमार ने दी। संवाद
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चंबा। संत निरंकारी सत्संग भवन मुगला में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता महात्मा डॉ. राजेंद्र ने की। सत्संग का शुभारंभ आरती वंदना से किया गया।
इस मौके पर दूरदराज के गांवों और कस्बों से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। महात्मा डॉ. राजेंद्र ने अपने सार गर्भित प्रवचनों से साध-संगत को भाव विभौर किया। कहा कि एक जिज्ञासु के जीवन में भक्ति की शुरुआत ही ब्रह्मज्ञान के बाद होती है। जब सद्गुरु की कृपा से जिज्ञासु को ब्रह्म ज्ञान हासिल हो जाता है तो उसके जीवन में भक्ति की शुरुआत वहीं से आरंभ हो जाती है। फिर भक्ति और मजबूत करने के लिए विश्वास की बात आती है। इसके लिए एक बहुत सरल तरीका है कि नित्यप्रति संतों का संग करें। सत्संग में आकर अच्छे गुणों को श्रवण करें और अपनी आध्यात्मिक जड़ों को और मजबूत करें। मन का रिश्ता इस परमात्मा के साथ सुमरिन से और पक्का करें। सत्संग के समापन पर भंडारे का आयोजन किया गया। यह जानकारी सेवादार विनोद कुमार ने दी। संवाद
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