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Chamba News: मणिमहेश नहीं पहुंचने वाले श्रद्धालु अर्द्ध गंगा कुंड में करते हैं स्नान
Thu, 07 Sep 2023 11:05 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Thu, 07 Sep 2023 11:05 PM IST
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भरमौर (चंबा)। मणिमहेश पहुंचने में असमर्थ श्रद्धालु चौरासी स्थित अर्द्धगंगा कुंड में स्नान कर पुण्य कमाते हैं। इस कुंड में स्नान करना मणिमहेश की डलझील में स्नान करने के समान ही माना जाता है। यह कुंड चौरासी परिसर में सूर्य लिंग और दसमुखी रावण मंदिर के बीच बना है। इस कुंड के साथ भगवान विष्णु के चरण स्थल भी बने हैं। इससे जाहिर होता है कि जब गंगा पृथ्वी पर आईं तो भगवान विष्णु के चरणों से निकलकर भगवान शंकर ने उसे अपनी जटाओं में धारण करने के बाद पृथ्वी पर अवतरित किया। इतना ही नहीं, यह भी मान्यता है कि इस अर्द्धगंगा कुंड के नीचे पांच जल की धाराएं भी हैं। ये अलग-अलग लोकों से यहां आई हैं। इसलिए कृष्ण जन्माष्टमी के शुभ मुहूर्त पर यहां स्नान करने का काफी महत्व है। स्थानीय लोग इस कुंड पर जन्माष्टमी के दिन स्नान और जल आचमन कर पुण्य अर्जित करते हैं। इस दिन कुंड में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रहती है। चौरासी मंदिर के पुजारी पंडित हरिशरण शर्मा ने बताया कि जब भगवान ब्रह्मा की सुंदर कन्या पर कुदृष्टि पड़ी तो उनके शरीर का हिस्सा काफी भद्दा हो गया। इससे मुक्ति पाने और 84 हजार योनियों से मुक्ति पाने के लिए ब्रह्मा को चौरासी की स्थापना करनी पड़ी थी। इसमें यह अर्द्धगंगा कुंड भी शामिल है। इस कुंड से जो जल बाहर निकलता है, उसे वैतरणी नदी कहा जाता है। महंत पंचम गिरी ने बताया कि मणिमहेश यात्रा के हर पडाव का विशेष महत्व है ।
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