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Chamba News: दिन खेतों के नाम, शाम चुनावी किस्सों के नाम

Wed, 27 May 2026 10:49 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा Updated Wed, 27 May 2026 10:49 PM IST
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Days are about farms, evenings are about election stories.
बनीखेत क्षेत्र के गांवों में फल की कटाई के साथ चौपालों में पक रहीं चुनावी रणनीतियां
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ग्रामीण क्षेत्रों में जोर-शोर से चल रहा गेहूं की कटाई और थ्रेसिंग का कार्य
संवाद न्यूज एजेंसी
बनीखेत (चंबा)। एक तरफ गांवों की चौपालों में चुनावी रणनीतियां पक रही हैं तो दूसरी तरफ खेतों में गेहूं की फसल कट रही है। बनीखेत और आसपास के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों ऐसा नजारा देखने को मिल रहा है जहां दिनभर किसानों के हाथों में दरातियां और शाम ढलते ही चुनावी चर्चाओं की कमान नजर आ रही है।
डलहौजी उपमंडल के बनीखेत और इसके साथ लगते ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों गेहूं की कटाई और थ्रेसिंग का कार्य जोर-शोर से चल रहा है। खेतों में सुबह से देर शाम तक किसानों की चहल-पहल देखने को मिल रही है। प्रदेश में पंचायत चुनावों का माहौल गरमाया है। वहीं, किसानों के सामने गेहूं की फसल को समय पर काटने और सुरक्षित घर पहुंचाने की चुनौती भी है। गांवों में खेतों के साथ चुनावी चर्चाएं भी चल रही हैं। किसान दिनभर खेतों में मेहनत करने के बाद शाम को चुनाव प्रचार और बैठकों में भी भाग ले रहे हैं।
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स्थानीय किसानों रमेश कुमार, मनीष कुमार, बलदेव राज, जोगिंदर, चमन लाल और राज कुमार ने बताया कि इस समय गांवों में दोहरी व्यस्तता का माहौल है। उन्होंने कहा कि कुछ पंचायतों में 26 मई को चुनाव हो चुके हैं। कुछ में आज मतदान हो रहा है जबकि कई पंचायतों में 31 मई को चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में किसानों को खेती-बाड़ी के कार्यों के साथ अपने समर्थित उम्मीदवारों के लिए प्रचार-प्रसार और चुनावी गतिविधियों में भी सक्रिय रहना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि गेहूं की फसल इस समय पूरी तरह पक चुकी है और मौसम को देखते हुए कटाई तथा थ्रेसिंग का कार्य जल्द पूरा करना जरूरी है। खेतों में महिलाएं और पुरुष फसल समेटने में जुटे हैं। दूसरी ओर चौपालों और गांव की गलियों में चुनावी चर्चाओं का दौर जारी है।
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हालांकि खेती का काम काफी मेहनत भरा है लेकिन इसके बावजूद चुनावों को लेकर ग्रामीणों में उत्साह कम नहीं हुआ है। गांवों में चुनावी रोमांच और खेती-किसानी दोनों साथ चलते दिखाई दे रहे हैं। किसानों का कहना है कि खेती उनकी आजीविका का आधार है और पंचायत चुनाव गांव के विकास से जुड़े हैं, इसलिए दोनों जिम्मेदारियां निभाना जरूरी है।
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