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Chamba News: दो साल बाद भी नहीं बनी क्षतिग्रस्त कुठेड़-लग्गा कूहल
Wed, 22 May 2024 10:51 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Wed, 22 May 2024 10:51 PM IST
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चुवाड़ी (चंबा)। जय जवान और जय किसान की बात कहने वाले देश में किसान परेशान हैं। जून के अंतिम सप्ताह में धान की पनीरी लगाने के लिए पानी न मिलने की चिंता दो पंचायतों के सैकड़ों किसानों को सता रही है।
किसानों का कहना है कि दो साल पहले बरसात के दौरान भारी बारिश से कुठेड़ लग्गा कूहल क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इससे खेतों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। ऐसे में धान की अच्छी पैदावार नहीं हो रही है। हालांकि, इस समस्या को लेकर एसडीएम को भी प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन क्षतिग्रस्त कूहल की मरम्मत तो दूर इसकी मरम्मत का आश्वासन भी नहीं मिला है।
किसानों में अनिल राणा, सुरेंद्र मनकोटिया, चैन लाल, चरण दास, विनोद शर्मा, उत्तम चंद, प्यार चंद और देस राज ने कहा कि कुडणु और बनेट पंचायतों की कई हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाने वाली कुठेड़ लग्गा कुहल का बांध तथा कूहल के डंगों को काफी नुकसान पहुंचा है। जब समस्या का समाधान करवाने के लिए विभाग से मांग उठाई तो संबंधित भू-सरंक्षण विभाग बजट न होने की बात कह रहा है। ऐसे में अब किसानों को धान की रोपाई करने को चिंता सताने लगी है। किसानों ने निर्णय लिया है कि इस बार वह धान की फसल नहीं लगा पाएंगे। खेतों में पानी न पहुंचने से धान की खेती करना काफी मुश्किल होता है। उधर, भू-संरक्षण विभाग के एडीओ आदर्श पुरी ने कहा कि बजट का प्रावधान होते ही प्राथमिकता के आधार पर कूहल की मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
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किसानों का कहना है कि दो साल पहले बरसात के दौरान भारी बारिश से कुठेड़ लग्गा कूहल क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इससे खेतों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। ऐसे में धान की अच्छी पैदावार नहीं हो रही है। हालांकि, इस समस्या को लेकर एसडीएम को भी प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन क्षतिग्रस्त कूहल की मरम्मत तो दूर इसकी मरम्मत का आश्वासन भी नहीं मिला है।
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किसानों में अनिल राणा, सुरेंद्र मनकोटिया, चैन लाल, चरण दास, विनोद शर्मा, उत्तम चंद, प्यार चंद और देस राज ने कहा कि कुडणु और बनेट पंचायतों की कई हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाने वाली कुठेड़ लग्गा कुहल का बांध तथा कूहल के डंगों को काफी नुकसान पहुंचा है। जब समस्या का समाधान करवाने के लिए विभाग से मांग उठाई तो संबंधित भू-सरंक्षण विभाग बजट न होने की बात कह रहा है। ऐसे में अब किसानों को धान की रोपाई करने को चिंता सताने लगी है। किसानों ने निर्णय लिया है कि इस बार वह धान की फसल नहीं लगा पाएंगे। खेतों में पानी न पहुंचने से धान की खेती करना काफी मुश्किल होता है। उधर, भू-संरक्षण विभाग के एडीओ आदर्श पुरी ने कहा कि बजट का प्रावधान होते ही प्राथमिकता के आधार पर कूहल की मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
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