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18 वर्ष से कम आयु के युवकों को नहीं मिलेगी खांसी की दवा
ब्यूरो, अमर उजाला, (चंबा)
Updated Sun, 04 Sep 2016 09:44 PM IST
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अब 18 वर्ष से कम आयु के युवक चंबा में किसी भी दवा विक्रेता से खांसी की दवा नहीं खरीद पाएंगे। नाबालिग युवकों को खांसी में इस्तेमाल होने वाली कोई भी दवा डॉक्टरों के बिना लिखे नहीं मिलेगी।
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स्वास्थ्य विभाग ने यह हिदायत दवा निरीक्षक के माध्यम से पूरे जिला के दवा विक्रेताओं को जारी कर दी है। यदि कोई दवा विक्रेता डॉक्टर की पर्ची पर 18 वर्ष से कम आयु मरीज को खांसी की दवा देता है तो उसे उसका नाम व पता भी दर्ज करना होगा। हिदायत का पालन न करने वाले दवा विक्रेता का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने चंबा में बढ़ती नशाखोरी को रोकने के लिए यह कदम उठाया है जिसके शुरूआत में खांसी की दवा को लिया गया है।
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ज्यादातर खांसी की दवाओं में कोडीन पाया जाता है और इसकी ज्यादा मात्रा शरीर व मन पर प्रतिकूल असर छोड़ती है। इन दिनों प्रदेश भर में भांग उखाड़ो अभियान को नशे के खिलाफ जंग के रूप में शुरू किया गया है। इस अभियान को चंबा में स्वास्थ्य विभाग लोगों को जागरूक कर मनाने जा रहा है। इस कड़ी में नाबालिगों को नशाखोरी से रोकने की पहल की गई है। हालांकि कुछ खांसी की दवाएं जिनमें कोरेक्स व दूसरे ब्रांड शामिल हैं, पहले ही प्रतिबंधित किए जा चुके हैं। इसके बावजूद अब कम उम्र के युवा खांसी की दूसरी दवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं।
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स्वास्थ्य विभाग सख्ती से अमल में लाएगा निर्देश : सीएमओ
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विनोद शर्मा ने बताया कि 18 वर्ष से कम आयु के युवकों को खांसी की दवा किसी भी सूरत में नहीं मिलेगी। डॉक्टर यदि ऐसी दवा लिखता है तो वो अभिभावकों की निगरानी में खरीदनी होगी। साथ ही दवा विक्रेता को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वह पर्ची पर लिखी तारीख ध्यान से पढ़े ताकि पुरानी पर्ची पर भी इस तरह की दवाएं न ली जा सकें।
कोडीन के इस्तेमाल से बिगड़ सकता है मानसिक संतुलन
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विनोद शर्मा की मानें तो कोडीन युक्त खांसी की दवा शरीर व मन पर असर डालती हैं। खांसी की दवा के ओवरडोज से व्यक्ति बेहोशी की हालत में पहुंच जाता है और काफी देर तक इसका नशा बना रहता है। लेकिन जब नशा उतरता है तो उसे अनिद्रा, बेचैनी, पाचन तंत्र में कमजोरी, दिल से जुड़ी बीमारियां व दिमागी संतुलन खराब हो सकता है।