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पाताल लोक से महाशिवरात्रि की शाम लौटेंगे शिव अपने धाम
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भरमौर का चौरासी मंदिर परिसर।
- फोटो : Chamba
भरमौर (चंबा)। महाशिवरात्रि का पर्व जनजातीय क्षेत्र भरमौर में विशेष महत्व रखता है। मान्यता अनुसार पाताल लोक से शिवरात्रि की शाम भगवान शंकर वापस अपने धाम कैलाश लौटते हैं। शिव नगरी में भगवान शिव के आगमन को लेकर चार धाम की विशेष पूजा का आयोजन होता है। सालों से इस परंपरा का निर्वहन होता आ रहा है। बहरहाल, महाशिवरात्रि को लेकर चौरासी परिसर फूलमालाओं और रंग-बिरंगी बिजली की लड़ियों से सजाया गया है।
चौरासी मंदिर के पुजारी पंडित हरिशरण शर्मा, पंडित लक्ष्मण दत्त शर्मा, पंडित सुरेश कुमार और प्रताप चंद ने बताया कि देव भूमि भरमौर के कण-कण में भगवान शिव विद्यमान हैं। मान्यता है कि पवित्र मणिमहेश यात्रा की समाप्ति पर भगवान शंकर पाताल लोक में भक्तों को दर्शन के लिए चले जाते हैं। जबकि, महाशिवरात्रि पर्व की रात को महादेव अपने धाम कैलाश लौटते हैं। मान्यता है कि इस रात भगवान शंकर चौरासी परिसर में रात्रि पड़ाव के लिए कुछ समय रुकते हैं।
भगवान शंकर के आगमन को लेकर चौरासी परिसर में जागरण और चार पहर ( रात्रि 9, 12, 2 और सुबह चार बजे) की विशेष पूजा-अर्चना होती है। बताया कि चार पहल के तहत सायं छह बजे होने वाली पूजा के दौरान बिल्व पत्र, गंगाजल, दूध, दही, शहद और घी से शिवलिंग का स्नान किया जाता है, जिसके बाद उनका शृंगार किया जाता है। शृंगार के बाद भक्तों के दर्शन के लिए कपाट खोल दिए जाते हैं। चौरासी परिसर में बिजली बोर्ड प्रबंधन तीन दशकों से मणिममहेश मंदिर में शिव नुआला, जागरण और लंगर का आयोजन करवाता रहा है।
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चौरासी मंदिर के पुजारी पंडित हरिशरण शर्मा, पंडित लक्ष्मण दत्त शर्मा, पंडित सुरेश कुमार और प्रताप चंद ने बताया कि देव भूमि भरमौर के कण-कण में भगवान शिव विद्यमान हैं। मान्यता है कि पवित्र मणिमहेश यात्रा की समाप्ति पर भगवान शंकर पाताल लोक में भक्तों को दर्शन के लिए चले जाते हैं। जबकि, महाशिवरात्रि पर्व की रात को महादेव अपने धाम कैलाश लौटते हैं। मान्यता है कि इस रात भगवान शंकर चौरासी परिसर में रात्रि पड़ाव के लिए कुछ समय रुकते हैं।
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भगवान शंकर के आगमन को लेकर चौरासी परिसर में जागरण और चार पहर ( रात्रि 9, 12, 2 और सुबह चार बजे) की विशेष पूजा-अर्चना होती है। बताया कि चार पहल के तहत सायं छह बजे होने वाली पूजा के दौरान बिल्व पत्र, गंगाजल, दूध, दही, शहद और घी से शिवलिंग का स्नान किया जाता है, जिसके बाद उनका शृंगार किया जाता है। शृंगार के बाद भक्तों के दर्शन के लिए कपाट खोल दिए जाते हैं। चौरासी परिसर में बिजली बोर्ड प्रबंधन तीन दशकों से मणिममहेश मंदिर में शिव नुआला, जागरण और लंगर का आयोजन करवाता रहा है।
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