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Chamba News: सांध्यकालीन कवि सम्मेलन में गूंजी चंबा की लोक ध्वनि
Tue, 15 Apr 2025 06:14 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Tue, 15 Apr 2025 06:14 AM IST
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चंबा। बैसाखी (बसोआ) पर्व के उपलक्ष्य में मिस्टिक विलेज़, नॉट ऑन मैप और अखिल भारतीय साहित्य परिषद, इकाई चंबा के संयुक्त सौजन्य से भलोली खज्जियार में सांध्यकालीन कवि सम्मेलन का आयोजन किया। इस साहित्यिक संध्या में चंबा की समृद्ध लोक संस्कृति, परिवेश और साहित्यिक चेतना को रेखांकित करते हुए युवा व वरिष्ठ कवियों ने अपनी सशक्त रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार सुभाष साहिल ने की जबकि काव्य पाठ करने वाले प्रमुख कवियों में युद्धवीर टंडन, किरण कुमार वशिष्ठ, रवि शर्मा, डॉ. कविता बिजलवान, शाम अजनबी, किशोर कालिया तथा बाल कवि आदिल और आसमा शामिल रहे। इस अवसर पर प्रस्तुत की गई कविताओं में सोचता तो है समंदर, किर्लू सेठ, नींद से जागो, धूम्र दण्डिका, लिल्ह बेलज देखो या मिस्टिक विलेज देखो जैसी रचनाएं विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। किरण कुमार वशिष्ठ द्वारा प्रस्तुत बसोआ और हिउंदा री गल्ला जैसी लोकधर्मी रचनाओं ने चंबा की सांस्कृतिक आत्मा को जीवंत कर दिया। विशेष उल्लेखनीय यह रहा कि युद्धवीर टंडन ने न केवल अपनी सशक्त रचनाओं से सभी को प्रभावित किया, बल्कि उन्होंने कार्यक्रम के मंच संचालन को भी अत्यंत कुशलता और विनम्रता से निभाया। उनके संचालन ने पूरी गोष्ठी को एक लयबद्ध, गरिमामयी और संवादात्मक स्वरूप प्रदान किया।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार सुभाष साहिल ने की जबकि काव्य पाठ करने वाले प्रमुख कवियों में युद्धवीर टंडन, किरण कुमार वशिष्ठ, रवि शर्मा, डॉ. कविता बिजलवान, शाम अजनबी, किशोर कालिया तथा बाल कवि आदिल और आसमा शामिल रहे। इस अवसर पर प्रस्तुत की गई कविताओं में सोचता तो है समंदर, किर्लू सेठ, नींद से जागो, धूम्र दण्डिका, लिल्ह बेलज देखो या मिस्टिक विलेज देखो जैसी रचनाएं विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। किरण कुमार वशिष्ठ द्वारा प्रस्तुत बसोआ और हिउंदा री गल्ला जैसी लोकधर्मी रचनाओं ने चंबा की सांस्कृतिक आत्मा को जीवंत कर दिया। विशेष उल्लेखनीय यह रहा कि युद्धवीर टंडन ने न केवल अपनी सशक्त रचनाओं से सभी को प्रभावित किया, बल्कि उन्होंने कार्यक्रम के मंच संचालन को भी अत्यंत कुशलता और विनम्रता से निभाया। उनके संचालन ने पूरी गोष्ठी को एक लयबद्ध, गरिमामयी और संवादात्मक स्वरूप प्रदान किया।
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