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Chamba News: मेडिकल कॉलेज में बढ़े आई फ्लू के मामले
Thu, 03 Aug 2023 11:31 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Thu, 03 Aug 2023 11:31 PM IST
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चंबा। मेडिकल कॉलेज चंबा में रोजाना आई फ्लू से पीड़ित मरीज उपचार करवाने के लिए पहुंच रहे हैं। रोजाना नेत्र रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में 230 से 260 तक मरीज उपचार करवाने के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें स्कूली विद्यार्थियों की संख्या सबसे अधिक है। आई फ्लू की बीमारी एक तरह से छुआछूत की तरह ही फैल रही है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विशेषज्ञ मरीजों को बार-बार साबुन से हाथ धोने, भीड़भाड़ के क्षेत्र में न जाने, रुमाल से आंखें साफ करने और रोजाना अपना रुमाल धोने की सलाह दे रहे हैं जिससे इस बीमारी से बचा जा सके।
गौर रहे कि आईफ्लू बीमारी की चपेट में जिले के बुजुर्ग, युवा, महिलाएं और स्कूली बच्चे आ रहे हैं। आलम यह है कि मेडिकल कॉलेज में 120 से 140 तक रोजाना रहने वाली ओपीडी में अब पहुंचने वाले मरीजों का आंकड़ा 260 तक पहुंच रहा है। आईफ्लू के बढ़ते मामलों की मुख्य वजह लोगों की लापरवाही भी है। लिहाजा, समय रहते चिकित्सीय परामर्श के बिना आंखों में दवाई डालना मरीजों की मुसीबतों को बढ़ा रहा है।
आई फ्लू के लक्षण
आंखें लाल होना, आंखों में खुजली होना, रेत के कण जैसा गिरने का आभास होना, पलकों में सूजन आना, आंखों में दर्द होना आदि इसके लक्षण हैं। इससे मरीज को बुखार तक आ जाता है। आई फ्लू के मामले बढ़ने का मुख्य कारण बीमार को छूना, उसके उपयोग किए गए सामान का इस्तेमाल करना शामिल है।
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आई फ्लू के बचाव के उपाय
आईफ्लू के सबसे अधिक मामले बच्चों में सामने आ रहे हैं। बच्चे एक-दूसरे से हाथ न मिलाएं। भीड़भाड़ से दूर रहें। बीमार मरीज का तौलिया इस्तेमाल न करें। बीमार व्यक्ति काला चश्मा पहने। चिकित्सीय परामर्श से ही दवाई लेकर बताए गए समयानुसार दवाई आंखों में डालें।
नेत्र रोग चिकित्सक डॉ.शैलेंद्र मिंहास ने आईफ्लू के मरीजों की संख्या बढ़ने की बात स्वीकार की है। बताया कि एक प्रकार से छूआछूत के तौर पर ही इस बीमारी को लिया जा सकता है। बीमार व्यक्ति के समान का इस्तेमाल करना मामले बढ़ने की बजह है।
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गौर रहे कि आईफ्लू बीमारी की चपेट में जिले के बुजुर्ग, युवा, महिलाएं और स्कूली बच्चे आ रहे हैं। आलम यह है कि मेडिकल कॉलेज में 120 से 140 तक रोजाना रहने वाली ओपीडी में अब पहुंचने वाले मरीजों का आंकड़ा 260 तक पहुंच रहा है। आईफ्लू के बढ़ते मामलों की मुख्य वजह लोगों की लापरवाही भी है। लिहाजा, समय रहते चिकित्सीय परामर्श के बिना आंखों में दवाई डालना मरीजों की मुसीबतों को बढ़ा रहा है।
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आई फ्लू के लक्षण
आंखें लाल होना, आंखों में खुजली होना, रेत के कण जैसा गिरने का आभास होना, पलकों में सूजन आना, आंखों में दर्द होना आदि इसके लक्षण हैं। इससे मरीज को बुखार तक आ जाता है। आई फ्लू के मामले बढ़ने का मुख्य कारण बीमार को छूना, उसके उपयोग किए गए सामान का इस्तेमाल करना शामिल है।
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आई फ्लू के बचाव के उपाय
आईफ्लू के सबसे अधिक मामले बच्चों में सामने आ रहे हैं। बच्चे एक-दूसरे से हाथ न मिलाएं। भीड़भाड़ से दूर रहें। बीमार मरीज का तौलिया इस्तेमाल न करें। बीमार व्यक्ति काला चश्मा पहने। चिकित्सीय परामर्श से ही दवाई लेकर बताए गए समयानुसार दवाई आंखों में डालें।
नेत्र रोग चिकित्सक डॉ.शैलेंद्र मिंहास ने आईफ्लू के मरीजों की संख्या बढ़ने की बात स्वीकार की है। बताया कि एक प्रकार से छूआछूत के तौर पर ही इस बीमारी को लिया जा सकता है। बीमार व्यक्ति के समान का इस्तेमाल करना मामले बढ़ने की बजह है।