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बनीखेत निवासी को जंगल में मिली दस इंच लंबी गुच्छी
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बनीखेत (चंबा)। बनीखेत क्षेत्र में लॉकडाउन के चलते लोग गुच्छियों की तलाश में जंगल का रुख कर रहे हैं। गुच्छी प्राकृतिक रूप से पैदा होती है और शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाती है। बाजार में गुच्छी पांच से छह हजार रुपये प्रति किलो की दर से बिकती है। लॉकडाउन के दौरान लोग जंगलों में जाकर गुच्छी ढूंढने को निकल रहे हैं। गुच्छी मार्च व अप्रैल के महीने में पैदा होती है। पहाड़ी क्षेत्रों और ठंडे इलाकों में इसकी अधिक पैदावार होती है।
अकसर देखा गया है कि गुच्छी जंगल में देवदार, चील व बान के पेड़ों के नीचे उगती है। लॉकडाउन के चलते लोग घरों में बेकार बैठे हैैं। ऐसे में कुछ लोग गुच्छी ढूंढकर कमाई करने का प्रयास कर रहे हैं। गुच्छी को बेचने से पहले आयुर्वेद विभाग में पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। गुच्छी स्वास्थ्य के लिए बहुत गुणकारी है। इसे दवाई बनाने के लिए भी प्रयोग में लाया जाता है। बनीखेत निवासी अनिल शर्मा को घर के पास जंगल में 10 इंच की लंबी गुच्छी मिली। इतनी लंबी गुच्छी शायद ही आज दिन तक किसी को मिली हो। आमतौर पर गुच्छियों की लंबाई 4 से 5 इंच तक रहती है।
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अकसर देखा गया है कि गुच्छी जंगल में देवदार, चील व बान के पेड़ों के नीचे उगती है। लॉकडाउन के चलते लोग घरों में बेकार बैठे हैैं। ऐसे में कुछ लोग गुच्छी ढूंढकर कमाई करने का प्रयास कर रहे हैं। गुच्छी को बेचने से पहले आयुर्वेद विभाग में पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। गुच्छी स्वास्थ्य के लिए बहुत गुणकारी है। इसे दवाई बनाने के लिए भी प्रयोग में लाया जाता है। बनीखेत निवासी अनिल शर्मा को घर के पास जंगल में 10 इंच की लंबी गुच्छी मिली। इतनी लंबी गुच्छी शायद ही आज दिन तक किसी को मिली हो। आमतौर पर गुच्छियों की लंबाई 4 से 5 इंच तक रहती है।
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