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Chamba News: जिले में गुच्छी की भरमार, इस बार मंदा रहा व्यापार
Mon, 08 Apr 2024 10:08 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Mon, 08 Apr 2024 10:08 PM IST
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चंबा। फरवरी और मार्च में हुई बारिश और बर्फबारी के चलते इस साल गुच्छी की अच्छी पैदावार हुई है। इन दिनों ग्रामीण क्षेत्रों के लोग जंगलों और बगीचों में गुच्छी की तलाश कर रहे हैं, लेकिन गुच्छी का कारोबार इस बार मंदा पड़ा हुआ है।
बाहरी जिलों से कोई व्यापार जिले में गुच्छी की खरीदारी करने चंबा नहीं पहुंचा है। इसकी कीमत पांच से 15 हजार रुपये किलो तक होती है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में लोग जंगलों में तैयार होने वाली गुच्छी से आय अर्जित करते हैं। इससे उन्हें अच्छी खासी आय हो जाती है। जंगल में तैयार होने वाली गुच्छी को औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि गुच्छी का सेवन दमा रोगियों के लिए काफी फायदेमंद होता है। जंगलों में तैयार होने वाली गुच्छी की हिमाचल के साथ बाहरी राज्यों में भारी मांग है। यह हर साल दस से पंद्रह हजार रुपये प्रति किलो की दर से बिकती है। सर्दियों में बर्फबारी के बाद तापमान में हल्की बढ़ोतरी के साथ दुनिया की सबसे महंगी सब्जियों में शुमार गुच्छी उगना शुरू हो जाती है। इसकी पैदावार मार्च तक होती है।
लोगों में विकास कुमार, खेम राज, किशोरी लाल, किशन चंद और हंस राज ने कहा कि यह गुच्छी पहाड़ी इलाकों में खुद तैयार होती है। इसके लिए उन्हें मेहनत नहीं करनी पड़ती है। बाजार में उन्हें इसके अच्छे दाम मिलते हैं। अन्य सब्जियों की इतनी मेहनत करने के बाद भी इतने दाम नहीं मिलते हैं। कहा कि सर्दियों के दिनों में गुच्छी ही उनकी आय का साधन होती है। इस वर्ष गुच्छी के कारोबार में ज्यादा लाभ नहीं हो पाया है। उधर, आयुष विभाग की अधिकारी डॉ. किरण शर्मा ने कहा कि जंगलों में प्राकृतिक तौर पर उगने वाली गुच्छी औषधीय गुणों से भरपूर होती है। यह कमजोरी को दूर करती है। इसका सेवन करना लाभकारी होता है।
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बाहरी जिलों से कोई व्यापार जिले में गुच्छी की खरीदारी करने चंबा नहीं पहुंचा है। इसकी कीमत पांच से 15 हजार रुपये किलो तक होती है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में लोग जंगलों में तैयार होने वाली गुच्छी से आय अर्जित करते हैं। इससे उन्हें अच्छी खासी आय हो जाती है। जंगल में तैयार होने वाली गुच्छी को औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि गुच्छी का सेवन दमा रोगियों के लिए काफी फायदेमंद होता है। जंगलों में तैयार होने वाली गुच्छी की हिमाचल के साथ बाहरी राज्यों में भारी मांग है। यह हर साल दस से पंद्रह हजार रुपये प्रति किलो की दर से बिकती है। सर्दियों में बर्फबारी के बाद तापमान में हल्की बढ़ोतरी के साथ दुनिया की सबसे महंगी सब्जियों में शुमार गुच्छी उगना शुरू हो जाती है। इसकी पैदावार मार्च तक होती है।
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लोगों में विकास कुमार, खेम राज, किशोरी लाल, किशन चंद और हंस राज ने कहा कि यह गुच्छी पहाड़ी इलाकों में खुद तैयार होती है। इसके लिए उन्हें मेहनत नहीं करनी पड़ती है। बाजार में उन्हें इसके अच्छे दाम मिलते हैं। अन्य सब्जियों की इतनी मेहनत करने के बाद भी इतने दाम नहीं मिलते हैं। कहा कि सर्दियों के दिनों में गुच्छी ही उनकी आय का साधन होती है। इस वर्ष गुच्छी के कारोबार में ज्यादा लाभ नहीं हो पाया है। उधर, आयुष विभाग की अधिकारी डॉ. किरण शर्मा ने कहा कि जंगलों में प्राकृतिक तौर पर उगने वाली गुच्छी औषधीय गुणों से भरपूर होती है। यह कमजोरी को दूर करती है। इसका सेवन करना लाभकारी होता है।
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