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राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में तैनात डॉक्टर चला रहे निजी क्लीनिक
Updated Fri, 27 Oct 2017 06:06 PM IST
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- फोटो : डेमो
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अमर उजाला ब्यूरो
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चंबा।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में तैनात डॉक्टर निजी क्लीनिक में सेवाएं दे रहे हैं। ऐसा करने वाले डॉक्टरों पर विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। सरकार ने छोटे बच्चों की स्वास्थ्य की जांच करने के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम स्कीम शुरू की है। इसके तहत स्कूलों और आंगनबाड़ियों में पढ़ने वाले छोटे बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की जा रही है। जांच के दौरान गंभीर बीमारी से ग्रसित पाए जाने वाले बच्चों को जिला अस्पताल के लिए रेफर किया जाता है। जहां पर बच्चे की बीमारी का पूरा इलाज मुफ्त होता है।
इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सरकार की ओर से डॉक्टरों, फार्मासिस्ट और फीमेल हेल्थ वर्कर की तैनाती की गई है। इन डॉक्टरों और अन्य स्टाफ को टीमों में बांटा गया है। जोकि स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर बच्चों के स्वास्थ्य की जांच कर रहे हैं। परंतु कुछ डॉक्टर ऐसे हैं जोकि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत तैनात तो हैं। लेकिन क्लीनिक चला रहे हैं। जबकि नियमानुसार सरकारी संस्थान में कार्यरत डॉक्टर निजी संस्थान नहीं चला सकता। ऐसा करने वाले डॉक्टरों पर विभाग की ओर से कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसका खामियाजा स्कूल व आंगनबाड़ी में पढ़ने वाले छोटे बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। उनके स्वास्थ्य की जांच नहीं हो पा रही है। हालांकि कुछ टीमें नियमित रूप से कामक कर रही हैं।
रजनीश कुमार, चैन लाल, रविंद्र, मनीष कुमार, सुरेश कुमार, कमल, जितेंद्र, मान सिंह, हंस राज, प्यार चंद, चंदू लाल, किशन कुमार व अमरीश कुमार ने जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग से मांग की कि बच्चों के स्वास्थ्य की जांच में ढील बरतने वाले डॉक्टरों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही उनके निजी क्लीनिकों पर भी तालेबंदी की जाए।
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जिला में 11 मोबाइल हेल्थ टीमें
जिला में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 11 मोबाइल हेल्थ टीमें गठित की गई हैं। जोकि गांव-गांव में जाकर स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य की जांच कर रही हैं। इन टीमों में से कुछ टीमों में तैनात डॉक्टर निजी क्लीनिक भी चला रहे हैं। इसकी वजह से वे बच्चों के स्वास्थ्य की जांच करने में ज्यादा समय नहीं दे पा रहे हैं।
सीएमओ शिकायत के इंतजार में
जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. वाईडी शर्मा ने बताया कि आरबीएस में तैनात कोई भी डॉक्टर निजी क्लीनिक नहीं चला सकता। अगर उनके पास किसी डॉक्टर की शिकायत आती है। तो खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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