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महिला ने पति की मौत को बताया हत्या की साजिश, जांच की मांग
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सांकेतिक तस्वीर
चंबा। पति की मौत को हत्या बताने वाली गुड्डी देवी की एफआईआर पुलिस ने एक महीने बाद भी दर्ज नहीं की है। इसको देखते हुए गुड्डी देवी और गांव मउआ के अन्य ग्रामीण एडीसी चंबा हेमराज बैरवा से मिले। एडीएम चंबा के सामने मृतक के परिजनों की आंखों से आंसू छलक पड़े। गुड्डी देवी ने एडीसी को बताया कि11 मार्च को उनके पति राजेंद्र कुमार कुकड़ोथा गांव में मदन कुमार के बेटे की शादी में गए थे। शादी पर आने को लेकर गांव के दो लोगों में काफी नाराजगी भी थी। एन्होंने उसे शादी समारोह के दौरान खरी खोटी बातें भी सुनाई। साथ ही जातिसूचक शब्द भी कहे गए। इसको लेकर उनके साथ बहसबाजी भी हुई थी। उसके बाद रात के समय प्रार्थी की बेटी को फोन आया कि राजेंद्र पगडंडी से पांव फिसलने से घायल हो गया है और उसकी तबीयत खराब है। उसे यहां से ले जाओ।
सूचना मिलते ही परिजन तुरंत मौके पर पहुंच गए। जहां पर राजेंद्र कुमार बेसुध हालत में पड़ा था। उसके नाक और मुंह से खून निकल रहा था। परिजन बेसुध हालत में उसे उपचार के लिए अस्पताल ले गए। जहां पर डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। उसके अगले दिन पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाया। जिसमें पगडंडी से गिरकर उसकी मौत होने की कहानी बताई गई, वहां पर जाकर जब परिजनों से छानबीन की तो पाया कि घटनास्थल में मृतक को मामूली चोट लग सकती थी। मगर उसकी मौत नहीं हो सकती।
इससे उन्हें शक हो गया कि राजेंद्र की किसी दुर्घटना में नहीं बल्कि हत्या के तहत मौत हुई है। हत्या की जांच करवाने को लेकर परिजनों ने पुलिस अधीक्षक को दो बार ज्ञापन सौंपे। मगर अभी तक उचित कार्रवाई नहीं हो पाई। अभी तक थाने में उनकी एफआईआर भी दर्ज नहीं की गई है। पुलिस की ओर से उन्हें हरेक बार कोई ना कोई बहाना बनाकर टाल दिया जाता है। एडीसी हेमराज बैरवा ने बताया कि उनके ध्यान में यह मामला लाया गया है। मृतक के परिजनों को आश्वासन दिया गया है कि उक्त मामले की पूरी जांच पड़ताल करवाई जाएगी।
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सूचना मिलते ही परिजन तुरंत मौके पर पहुंच गए। जहां पर राजेंद्र कुमार बेसुध हालत में पड़ा था। उसके नाक और मुंह से खून निकल रहा था। परिजन बेसुध हालत में उसे उपचार के लिए अस्पताल ले गए। जहां पर डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। उसके अगले दिन पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाया। जिसमें पगडंडी से गिरकर उसकी मौत होने की कहानी बताई गई, वहां पर जाकर जब परिजनों से छानबीन की तो पाया कि घटनास्थल में मृतक को मामूली चोट लग सकती थी। मगर उसकी मौत नहीं हो सकती।
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इससे उन्हें शक हो गया कि राजेंद्र की किसी दुर्घटना में नहीं बल्कि हत्या के तहत मौत हुई है। हत्या की जांच करवाने को लेकर परिजनों ने पुलिस अधीक्षक को दो बार ज्ञापन सौंपे। मगर अभी तक उचित कार्रवाई नहीं हो पाई। अभी तक थाने में उनकी एफआईआर भी दर्ज नहीं की गई है। पुलिस की ओर से उन्हें हरेक बार कोई ना कोई बहाना बनाकर टाल दिया जाता है। एडीसी हेमराज बैरवा ने बताया कि उनके ध्यान में यह मामला लाया गया है। मृतक के परिजनों को आश्वासन दिया गया है कि उक्त मामले की पूरी जांच पड़ताल करवाई जाएगी।
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