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Bilaspur News: अध्यापकों को दी साप्ताहिक आयरन फोलिक एसिड की जानकारी
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झंडूता में अध्यापकों के लिए प्रशिक्षण शिविर का हुआ आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। स्वास्थ्य खंड झंडूता में स्वास्थ्य विभाग की ओर से साप्ताहिक आयरन फोलिक एसिड विषय पर अध्यापकों के लिए प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तलाई के प्रभारी डॉ. अतुल और डॉ. अरविंद टंडन ने की।
डॉ. अरविंद टंडन ने बताया कि साप्ताहिक आयरन फोलिक एसिड सप्लीमेंटेशन मौजूदा एनीमिया रोग को खत्म करने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। डॉ. अखिलेश ने बताया कि इसके साथ वर्ष में दो बार कृमि नियंत्रण कार्यक्रम भी आरंभ किया गया, जिसमें बच्चों को साल में दो बार एल्बेंडाजोल की टेबलेट खिलाई जाती है।
स्वास्थ्य शिक्षक दीप कुमार ने कहा कि बिप्स एनीमिया की रोकथाम के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह कार्यक्रम 2012 में भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा चलाया गया है। एनीमिया को खत्म करने के लिए बच्चों को पहली से पांचवीं कक्षा तक के बच्चों को पिक गोली और छठी क्लास से लेकर 12वीं क्लास तक के बच्चों को नीली गोली स्कूल में सप्ताह में एक बार दी जाती है। इस प्रशिक्षण में लगभग 40 स्कूलों के अध्यापकों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। स्वास्थ्य खंड झंडूता में स्वास्थ्य विभाग की ओर से साप्ताहिक आयरन फोलिक एसिड विषय पर अध्यापकों के लिए प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तलाई के प्रभारी डॉ. अतुल और डॉ. अरविंद टंडन ने की।
डॉ. अरविंद टंडन ने बताया कि साप्ताहिक आयरन फोलिक एसिड सप्लीमेंटेशन मौजूदा एनीमिया रोग को खत्म करने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। डॉ. अखिलेश ने बताया कि इसके साथ वर्ष में दो बार कृमि नियंत्रण कार्यक्रम भी आरंभ किया गया, जिसमें बच्चों को साल में दो बार एल्बेंडाजोल की टेबलेट खिलाई जाती है।
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स्वास्थ्य शिक्षक दीप कुमार ने कहा कि बिप्स एनीमिया की रोकथाम के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह कार्यक्रम 2012 में भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा चलाया गया है। एनीमिया को खत्म करने के लिए बच्चों को पहली से पांचवीं कक्षा तक के बच्चों को पिक गोली और छठी क्लास से लेकर 12वीं क्लास तक के बच्चों को नीली गोली स्कूल में सप्ताह में एक बार दी जाती है। इस प्रशिक्षण में लगभग 40 स्कूलों के अध्यापकों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।
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