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नगदी खत्म होने पर खाने पीने की वस्तुओं का पैदा होने लगा है संकट

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 26 Feb 2022 11:38 PM IST
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ucrane attack issue
बिलासपुर (रामपुर)। क्षेत्र के दो और छात्र सलमान अली और फुरकान अली भी यूक्रेन के सूमी प्रदेश में बमबारी के बीच सुरक्षा की दृष्टि से तहखानों में रहने के लिए विवश हैं। छात्रों ने अपने परिजनों को फोन पर बताया कि शनिवार दोपहर वह सीमांत अन्य देशों के जरिये अपने घर आने के लिए तहखानों से बाहर निकले थे। अचानक भारी गोलाबारी होनी शुरू हो गई। फिर से अपने स्थानों पर चले जाने को विवश होना पड़ा। छात्रों ने बताया कि एटीएम में कैश खत्म होने के कारण अब पास में नकदी भी नहीं हैं। खाने-पीने की वस्तुओं को खरीदने के लिए दिक्कतें भी प्रारंभ हो गई हैं। वहीं, दोनों छात्रों के परिजनों की रात की नींद भी उड़ गई है। परिजन अपने बच्चों की सलामती और घर वापसी के लिए दिन रात दुआ कर रहे हैं।
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क्षेत्र के ग्राम मनकरा का मजरा निवासी फरमान अली के मुताबिक उनका पुत्र सलमान अली यूक्रेन के सूमी स्टेट की मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस तृतीय वर्ष की पढ़ाई कर रहा है। सलमान सूमी यूनिवर्सिटी के समीप एक फ्लैट में अपने कुछ अन्य साथियों के साथ रहकर पढ़ाई कर रहा है। शनिवार को यहां घर में सलमान के परिजन बेहद मायूस दिखे। सलमान के पिता फरमान और मां शाहाना बेगम ने बताया कि सलमान उनका सबसे बड़ा पुत्र है। उनके पुत्र ने आज बताया कि सूमी से सीमांत देश रोमानिया, पोलैंड आदि देश करीब 1800 किलोमीटर दूर है, जो करीब 20 से 22 घंटे का रास्ता है। सलमान ने अपने परिजनों को बताया है कि भारतीय दूतावास ने स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं कि कोई भी छात्र अपने फ्लैट या तहखाने से बाहर नहीं निकलेगा। सलमान ने बताया कि उसने 14 फरवरी को टिकट बुक कराया था, जो 26 फरवरी को उसे अपने घर के लिए आना था। मगर, 22 फरवरी की रात में ही बमबारी चालू हो गई। ऐसे में वह वहां अपने तमाम साथियों के साथ फंसा हुआ है। आज दिन में भी भारी गोलाबारी हुई है, जिससे कारण पर दहशत भरे माहौल में है।
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मनकरा के मजरा निवासी छात्र फुरकान के पिता नामे अली, भाई अबरार, मां तस्लीम जहां आदि अपने घर में फुरकान के घर वापसी की दुआ करते देखे गए। फुरकान भी सूमी के समीप कुर्सियां के एक हॉस्टल के बेसमेंट में अपने करीब 50 छात्रों के साथ ठहरा हुआ है। फुरकान ने अपने परिजनों को बताया कि वह आज दोपहर हॉस्टल से बाहर घर आने के लिए अपने साथियों के साथ निकला, तो अचानक गोलाबारी शुरू हो गई, जिसकी वजह से वह भयभीत होकर सभी लोग बेसमेंट में जाकर छुप गए। नामे अली ने बताया कि उनका बेटा फुरकान अगस्त 2017 को एमबीबीएस करने के लिए यूक्रेन गया था। उसका एक वर्ष का कोर्स ही रह गया है।
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