बिलासपुर। जिले में डेंगू का प्रकोप कम होने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार डेंगू के तीन और मरीज मिले हैं। शहर में डेंगू के संक्रमण का खतरा कुछ ज्यादा ही है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उपचाराधीन 74 मरीजों में सबसे अधिक 40 मरीज शहरी क्षेत्र के हैं। डेंगू के बढ़ते मामलों को लेकर स्वास्थ्य विभाग और नगर परिषद की टीमें भी मैदान में उतर गई हैं।
बुधवार को डेंगू के रोगियों की पहचान और रोकथाम के बारे में शहर के डियारा और रौड़ा सेक्टर में डेंगू के बारे में जागरूकता शिविर आयोजन किया गया। शिविर में स्वास्थ्य शिक्षक दीप कुमार और कमल कुमार ने डेंगू के बारे में विस्तृत जानकारी दी। इसके अलावा स्वास्थ्य पर्यवेक्षक जोगिंदर सिंह, रमेश चंद और किरण कुमारी ने घर-घर जाकर लोगों को साफ-सफाई और डेंगू मच्छरों के पैदा होने वाले स्थानों की रोकथाम के बारे में जागरूक किया। उधर, नगर परिषद के कर्मचारी क्षेत्र में फॉगिंग और स्प्रे कर रहे हैं। उधर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी बिलासपुर डॉ. प्रवीण कुमार ने बताया कि डेंगू एडीस नामक मादा मच्छर के काटने पर फैलता है। एडीस मादा मच्छर डेंगू से ग्रसित व्यक्ति को काट कर आठ से 10 दिनों में खुद संक्रमित हो जाती है, जब वह स्वस्थ व्यक्ति को काटती है तो एक किस्म के विषाणु के संक्रमण से उसे 5-6 दिन में रोग के लक्षण चेहरा लाल, उच्च बुखार, सिर, मांसपेशी और जोड़ दर्द, आंखों को हिलाने डुलाने में दर्द, चेहरे, गले तथा छाती पर लाल चकत्ते, मितली और उल्टी आने शुरू हो जाते हैं। ऐसे में शीघ्र डॉक्टर से संपर्क करें।