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Bilaspur News: शक्कर की मिठास और खुशबू किसानों को कर रही मालामाल
Mon, 10 Feb 2025 11:55 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Mon, 10 Feb 2025 11:55 PM IST
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बिलासपुर के जमथल में भट्टी में शक्कर तैयार करते किसान । संवाद
- शक्कर व्यवसाय से आर्थिकी सुदृढ़ कर रहे जमथल के किसान
- एक किलोग्राम शक्कर 120 रुपये में बिक रही, मिल रहे एडवांस आर्डर
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले के जमथल की वादियों में इन दिनों लहलहाती गन्ने की फसल से शक्कर बनाने का कारोबार पूरी तरह से जोर पकड़ चुका है। यहां की शक्कर की मिठास से किसानाें की आर्थिकी सुदृढ़ हो रही है। पारंपरिक प्रक्रिया से बन रही शक्कर की मांग इतनी है कि किसानों को एडवांस ऑर्डर मिल रहे हैं। इसके अलावा हरनोड़ा, चम्यौण और कसोल में आगामी माह से शक्कर बनाने का काम शुरू होगा।
जमथल गांव के किसान चौधरी बलिया राम की शक्कर भी हाथों हाथ बिकना शुरू हो गई है। लोग दूर-दूर से ताजी शक्कर खरीदने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत किसान कुलदीप ठाकुर, पूर्व बीडीसी सदस्य सुरजीत ठाकुर, दिला राम, एनटीपीसी में कार्यरत किसान सुशील ठाकुर का शक्कर निकलने का काम भी जोरों से चला हुआ है। इनके बेलने के पास भी खरीदारों का जमावड़ा देखने को मिल रहा है। किसान चौधरी बलिया राम ने बताया कि जंगलों से टौर के पत्तों से पूड़ी बनाकर उसमें 24 किलोग्राम की पैकिंग की जा रही है। एक पूड़ी का मूल्य 2600 रुपये चल रहा है। एक किलोग्राम शक्कर 120 रुपये में दी जा रही है। इस दौरान उन्होंने घुमारवीं से आए डॉ. सुमन को मौके पर बेलना, कड़ा, चाक, बण यानि भट्टी सहित शक्कर बनाने का पूरी प्रक्रिया बताई। चार घंटो में शक्कर की बनाने की विधि में एक किसान की बहुत ही मेहनत लगती है। इस शक्कर की खुशबू इतनी आकर्षक होती है कि दूर-दूर से लोग इसे खरीदने के लिए आते हैं। लोग बड़े चाव से ताजा शक्कर और घी के मिश्रण को पसंद करते हैं। यह शक्कर न केवल स्वाद में उत्कृष्ट है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी मानी जाती है। शक्कर के इस स्वाद और ताजगी की वजह से यह व्यवसाय तेजी से बढ़ रहा है और किसानों को अच्छी कमाई हो रही है। इन गांवों में शक्कर का कारोबार कई साल से पारंपरिक खेती करते आ रहे।
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- एक किलोग्राम शक्कर 120 रुपये में बिक रही, मिल रहे एडवांस आर्डर
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले के जमथल की वादियों में इन दिनों लहलहाती गन्ने की फसल से शक्कर बनाने का कारोबार पूरी तरह से जोर पकड़ चुका है। यहां की शक्कर की मिठास से किसानाें की आर्थिकी सुदृढ़ हो रही है। पारंपरिक प्रक्रिया से बन रही शक्कर की मांग इतनी है कि किसानों को एडवांस ऑर्डर मिल रहे हैं। इसके अलावा हरनोड़ा, चम्यौण और कसोल में आगामी माह से शक्कर बनाने का काम शुरू होगा।
जमथल गांव के किसान चौधरी बलिया राम की शक्कर भी हाथों हाथ बिकना शुरू हो गई है। लोग दूर-दूर से ताजी शक्कर खरीदने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत किसान कुलदीप ठाकुर, पूर्व बीडीसी सदस्य सुरजीत ठाकुर, दिला राम, एनटीपीसी में कार्यरत किसान सुशील ठाकुर का शक्कर निकलने का काम भी जोरों से चला हुआ है। इनके बेलने के पास भी खरीदारों का जमावड़ा देखने को मिल रहा है। किसान चौधरी बलिया राम ने बताया कि जंगलों से टौर के पत्तों से पूड़ी बनाकर उसमें 24 किलोग्राम की पैकिंग की जा रही है। एक पूड़ी का मूल्य 2600 रुपये चल रहा है। एक किलोग्राम शक्कर 120 रुपये में दी जा रही है। इस दौरान उन्होंने घुमारवीं से आए डॉ. सुमन को मौके पर बेलना, कड़ा, चाक, बण यानि भट्टी सहित शक्कर बनाने का पूरी प्रक्रिया बताई। चार घंटो में शक्कर की बनाने की विधि में एक किसान की बहुत ही मेहनत लगती है। इस शक्कर की खुशबू इतनी आकर्षक होती है कि दूर-दूर से लोग इसे खरीदने के लिए आते हैं। लोग बड़े चाव से ताजा शक्कर और घी के मिश्रण को पसंद करते हैं। यह शक्कर न केवल स्वाद में उत्कृष्ट है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी मानी जाती है। शक्कर के इस स्वाद और ताजगी की वजह से यह व्यवसाय तेजी से बढ़ रहा है और किसानों को अच्छी कमाई हो रही है। इन गांवों में शक्कर का कारोबार कई साल से पारंपरिक खेती करते आ रहे।
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