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Bilaspur News: श्रद्धालुओं को सुनाई कृष्ण की जन्म कथा

Sun, 04 Jan 2026 11:46 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Sun, 04 Jan 2026 11:46 PM IST
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The story of Krishna's birth was narrated to the devotees.
जोल गांव में चल रही श्रीमद भागवत कथा में प्रवचन देते हुए कथावाचक पंडित रसिक। स्रोत: जागरूक पाठक
जोल गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का चौथा दिन
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हरलोग के जोल गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथावाचक पंडित रसिक जी महाराज ने भगवान कृष्ण के जन्म कथा का भावपूर्ण तरीके से प्रसंग सुनाया।

उन्होंने कहा कि जब-जब धरती पर अत्याचार बढ़ता है तो दुष्टों के संहार के लिए भगवान किसी न किसी रूप में अवतार लेते हैं। द्वापर युग में भोजवंशी राजा उग्रसेन मथुरा में राज्य करता था। उसके आततायी पुत्र कंस ने उसे गद्दी से उतार दिया और स्वयं मथुरा का राजा बन बैठा। कंस की एक बहन देवकी थी, जिसका विवाह वासुदेव यदुवंशी सरदार से हुआ था। एक समय कंस अपनी बहन देवकी को उसकी ससुराल पहुंचाने जा रहा था। रास्ते में आकाशवाणी हुई कि कंस, जिस देवकी को तू बड़े प्रेम से ले जा रहा है, उसी के गर्भ में तेरा काल जन्म लेगा। कंस ने वासुदेव और देवकी को कारागृह में डाल दिया। वासुदेव देवकी के एक-एक करके सात बच्चे हुए और उनको जन्म लेते ही कंस ने मार डाला। अब आठवां बच्चा होने वाला था। कारागार में उन पर कड़ा पहरे बैठा दिए गया। उसी समय नंद की पत्नी यशोदा को भी बच्चा होने वाला था। वासुदेव देवकी को पुत्र पैदा हुआ, उसी समय संयोग से यशोदा के गर्भ से एक कन्या का जन्म हुआ जो और कुछ नहीं सिर्फ माया थी। जिस कोठरी में देवकी वासुदेव कैद थे, उसमें अचानक प्रकाश हुआ और उनके सामने शंख, चक्र, गदा, पद्म धारण किए चतुर्भुज भगवान प्रकट हुए। दोनों भगवान के चरणों में गिर पड़े। तब भगवान ने उनसे कहा कि अब मैं पुन: नवजात शिशु का रूप धारण कर लेता हूं। तुम मुझे इसी समय अपने मित्र नंद जी के घर वृंदावन में भेज आओ और उनके यहां जो कन्या जन्मी है, उसे लाकर कंस के हवाले कर दो। उसी समय वासुदेव नवजात शिशु रूप श्री कृष्ण को सूप में रखकर कारागृह से निकल पड़े और अथाह यमुना को पार कर नंद जी के घर पहुंचे। इस दौरान श्री कृष्ण जी के जन्म को लेकर मनमोहक भजन भी गाए गए।
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