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प्रायश्चित और भक्ति से ही मिलता है आत्मिक शांति का मार्ग : शुक्ला

Wed, 11 Mar 2026 11:03 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Wed, 11 Mar 2026 11:03 PM IST
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The path to spiritual peace is found only through repentance and devotion: Shukla
डीहर गांव में कथा सुनते श्रद्धालु। स्रोत: आयोजक
-मोरसिंघी पंचायत के डीहर गांव में श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन उमड़े श्रद्धालु
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संवाद न्यूज एजेंसी

भगेड़ (बिलासपुर)। उपमंडल घुमारवीं की ग्राम पंचायत मोरसिंघी के गांव डीहर में शुरू हुई श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन बुधवार को कथा व्यास पंडित दिवाकर शुक्ला ने श्रद्धालुओं को भक्ति, सदाचार और आत्मचिंतन का महत्व बताया। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि मनुष्य से जीवन में गलती हो जाना स्वाभाविक है, लेकिन उस गलती का समय रहते प्रायश्चित करना और स्वयं को सुधारना ही सच्चा धर्म है।


उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य अपनी भूल को स्वीकार कर पश्चाताप करता है तो वह पाप से मुक्त हो सकता है, लेकिन यदि वह अपनी गलती को अनदेखा करता है तो वही भूल आगे चलकर बड़े पाप का कारण बन जाती है। कथा व्यास ने पांडवों के जीवन का उदाहरण देते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी भक्तों की रक्षा होती है। उन्होंने राजा परीक्षित की कथा सुनाते हुए कहा कि कलयुग के प्रभाव में आकर उनसे एक भूल हो गई थी, जिसके कारण उन्हें ऋषि के श्राप का सामना करना पड़ा। बाद में अपनी गलती का एहसास होने पर उन्होंने महर्षि शुकदेव से श्रीमद् भागवतकथा का श्रवण कर आत्मिक शांति प्राप्त की। बताया कि भक्ति मनुष्य के जीवन का ऐसा निवेश है, जो हर परिस्थिति में उसे मानसिक शांति और सही मार्ग दिखाती है। सच्ची श्रद्धा और विश्वास मनुष्य को मोक्ष के मार्ग की ओर अग्रसर करते हैं। द्वापर युग का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि धर्मराज युधिष्ठिर ने सूर्यदेव की उपासना कर अक्षय पात्र प्राप्त किया था, जिससे वनवास के दौरान पांडवों को भोजन की कमी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वज प्रकृति और पृथ्वी को देवतुल्य मानते थे और उनका संरक्षण करते थे, इसलिए प्रकृति भी मानव जीवन का संतुलन बनाए रखती है। कथा व्यास ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का वास्तविक लाभ तभी मिलता है जब श्रोता के मन में जिज्ञासा, श्रद्धा और विश्वास हो। परमात्मा भले ही दिखाई न दें, लेकिन वह प्रत्येक जीव और कण-कण में विद्यमान हैं। कथा के दूसरे दिन आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा स्थल पर पहुंचे और भक्ति भाव से कथा का श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त किया। कथा स्थल पर पूरे दिन श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना रहा।
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