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गणेश जी का विशाल सिर बड़ी सोच का प्रतीक : पंडित सुशील

Tue, 05 Mar 2024 11:23 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 05 Mar 2024 11:23 PM IST
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The huge head of Ganesh ji is a symbol of big thinking: Pandit Sushil
- श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में चल रही कथा में सुनाई श्री गणेश महिमा
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शहर के डियारा सेक्टर के श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में मंदिर न्यास के सौजन्य से चल रही श्री शिव महापुराण कथा में प्रवचन करते हुए कथावाचक पंडित सुशील कुमार ने भगवान गणेश की महिमा के बारे में श्रद्धालुओं को बताया। उन्होंने कहा कि भगवान गणेश भगवान शिव और देवी पार्वती के पुत्र हैं। इनके 108 नाम हैं, जबकि विशाल सिर बड़ी सोच का प्रतीक है। विशाल कान अधिक सुनने का प्रतीक हैं।
उन्होंने कहा कि गणेश जी की छोटी आंखें .एकाग्रता, अंकुश उच्च लक्ष्य तक पहुंचाने, हाथी दांत बुराई को दूर कर अच्छा बने रहने का प्रतीक हैं। भगवान शिव के पास बहुत गण थे जो उनके सभी आदेशों का सम्मान करते थे, लेकिन देवी पार्वती के पास कोई गण नहीं था। इस बात से परेशान होकर एक बार जब देवी पार्वती जी स्नान कर रही थीं तब उन्होंने स्नान के दौरान अपने शरीर पर लगे उबटन से एक पुतला बनाया और अपनी शक्ति से, उन्होंने उस मानव आकार वाले पुतले में प्राणों का संचार किया। इससे एक बालक उत्पन्न हुआ। माता पार्वती ने उसे गणेश नाम दिया और सख्त आदेश दिया कि उनकी मर्जी के बगैर किसी को भी महल में प्रवेश नहीं होने दें। इस बीच शिवजी हिमालय से तपस्या पूरी करके लौटे और पार्वती के महल के अंदर प्रवेश करने का प्रयास किया, लेकिन गणेश जी ने अपनी माता की आज्ञा का पालन करते हुए शिव जी को महल में प्रवेश करने से मना कर दिया। इससे गणेश जी को शिव जी के प्रतिरोध का सामना करना पड़ा। अज्ञानता और क्रोधवश शिव जी ने अपने त्रिशूल से गणेश का वध कर दिया और पार्वती जी के महल में प्रवेश कर गए।
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पंडित जी ने बताया कि जब पार्वती जी ने देखा कि उनका पुत्र गणेश मर गया है। भगवान शिव ने भगवान विष्णु से अनुरोध किया कि वह उस पहले प्राणी का सिर लेकर आएं जो मार्ग में सबसे पहले अकेला मिले यानी जो अपनी मां के साथ न हो। ऐसा ही किया गया। विष्णु एक हथिनी के बच्चे का सिर लेकर आए। शिव जी ने वह सिर गणेश के शरीर के ऊपर रख दिया और अपनी शक्ति से गणेश जी को जीवनदान दिया। कथा समापन पर प्रसाद वितरण भी किया गया।
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