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167 इंजीनियरों की सेवाएं समाप्त करने का निर्णय तानाशाही : महेंद्र

Sat, 21 Oct 2023 05:25 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 21 Oct 2023 05:25 PM IST
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The decision to terminate the services of 167 engineers is dictatorial: Mahendra
कहा, नौकरी न देकर कर्मचारियों की रोजी-रोटी छीनने का काम कर रही सरकार
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संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। प्रदेश सरकार के 167 जूनियर इंजीनियर की सेवाएं समाप्त करने का निर्णय अन्यायपूर्ण व तानाशाही है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता महेंद्र धर्माणी ने सरकार के इस निर्णय को कर्मचारी विरोधी मानसिकता का परिचायक बताते हुए कहा कि चुनावों में झूठे वायदे करके सत्ता में आई सरकार अब कर्मचारियों की उचित मांगों को न मानकर उनके साथ अमानवीय व्यवहार करने पर उतारू दिखती है, जो अत्यंत निंदनीय है।

कहा कि चुनावों से पहले मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने जिला परिषद कर्मचारियों के धरने और आंदोलन में शामिल होकर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद तुरंत इस मांग को पूरा करने का आश्वासन दिया था, लेकिन सत्ता प्राप्ति के बाद कांग्रेस अपनी आदत और स्वभाव के अनुसार अपने चुनावी वायदे से पीछे हट रही है और कर्मचारियों को प्रताड़ित करने पर आमादा है। भाजपा सरकार के इस निर्णय का विरोध करती है। गांव के विकास में इन जिला परिषद कर्मचारियों का महत्वपूर्ण व सराहनीय योगदान है। अपने व परिवार के भविष्य की चिंता के कारण यह कर्मचारी शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन कर रहे हैं और सरकार सत्ता के अहंकार से इस आंदोलन को कुचलने का काम कर रही है, जो सरकार की संवेदनहीनता को जाहिर करता है। कहा कि कांग्रेस प्रतिवर्ष एक लाख नौकरी देने के वादे (गारंटी) के साथ सत्ता में आई थी। परंतु सरकार नौकरी न देकर कर्मचारियों की रोजी-रोटी छीनने का काम कर रही है। 10 माह के अंदर आईजीएमसी शिमला,जल शक्ति विभाग, लोनिवि, स्वास्थ्य विभाग (कोरोना वूमेन) में आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई। इसके कारण इन कर्मचारियों के सामने रोटी की समस्या खड़ी हो गई है। मजबूर होकर कर्मचारी आंदोलन कर रहे हैं। धर्माणी ने सरकार से मांग की कि जिला परिषद के अंतर्गत काम कर रहे 167 जूनियर इंजीनियर्स की सेवाओं को समाप्त करने के निर्णय को वापस ले। सरकार जिला परिषद कर्मचारियों के मांगों पर मानवीय दृष्टिकोण अपनाकर सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाने और अपने चुनावी वादे के अनुरूप कर्मचारियों की मांगों को पूरा करे।
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