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Bilaspur News: तेरा मेरा प्यार सजना बचपना रा पर खूब झूमे दर्शक
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-भराड़ी में तीन दिवसीय अजमेरपुर ग्रीष्मोत्सव का धूमधाम से समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी(बिलासपुर)। भराड़ी में तीन दिवसीय अजमेरपुर ग्रीष्मोत्सव की अंतिम सांस्कृतिक संध्या हिमाचली गायक ममता भारद्वाज और नाटी किंग सुरेश शर्मा के नाम रही। इन कलाकारों ने हिंदी, पंजाबी व पहाड़ी गीताें पर लोगों को खूब नचाया। अंतिम सांस्कृतिक संध्या में घुमारवीं के सतीश सोनी व इनके भाई रजत निशांत मुख्य रूप से मौजूद रहे।
कमेटी की तरफ से शाल, टोपी और स्मृति चिन्ह देकर मुख्य अतिथि को सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि ने दीप प्रज्वलन कर सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ किया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए मुख्य अतिथि ने 21 हजार रुपये व दंगल के विजेता पहलवानों को गुर्ज भेंट स्वरूप दिए। अंतिम सांस्कृतिक संध्या में हिमाचली गायिका ममता भारद्वाज ने तेरा मेरा प्यार सजना बचपना रा, साहिबां रिये बीबीये, पाणी री टांकी ओ भाई रामा, इना बड़ियां जो तुड़का लाणा ओ ठेकेदारनिये, इस गराएं देया लंबड़ा ओ इन्ना छोरुआ जो लेयां समझाई, तू मोई अछरिये तू मोई ओ, दिल धड़काये सिटी बजाए, तेरी आंखों का ये काजल मेरा दिल तड़फाये, मन्ने पल पल पल पल याद तेरी तड़फाये, कजो नैण मिलाए ओ जानी मेरिये, कितु ते आया मेरा रुण झुणुआं कितु ते आइयां दो जणीयां, मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है, इक मुंडा पंजाबी उदे नैन शराबी, दिल लै गई कुड़ी गुजरात दी, मेरे पीर दी जुगनी जुगनी जी, हुस्न पहाड़ों का क्या कहना कि बारों महीने यहां मौसम जाड़ों का गीत प्रस्तुत कर लोगों का मनोरंजन किया।
वहीं हिमाचली नाटी किंग सुरेश शर्मा ने गोरा गोरा मुखड़ा तेरा देख्यो, भागवा पैनी साधु बणी जा, कानो रे झुमके छन छन करदे, नहीं सताण दिलडु अडीए इक्की दूजे रा, नाची नाची नाची रे सिरमौरी वालिये, तुम्हारी नजर क्यों खता हो गई आदि गीतों से उपस्थित दर्शकों को नाचने पर मजबूर कर दिया। इस मौके पर मेला कमेटी अध्यक्ष, मेला कमेटी सदस्य, कई पंचायतों के प्रतिनिधि व अन्य गण्यमान्य लोग उपस्थित रहे।
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इनसेट
जावेद की एंकरिंग ने दर्शकों का मन मोहा
ग्रीष्मोत्सव में पहली बार मंच संचालन के लिए बुलाए गए बिलासपुर के एंकर जावेद ने अपनी आवाज और शायरी के सभी लोग मुरीद हो गए। जाबेद ने कार्यक्रम में ऐसा रंग भरा कि जब भी बीच में वह मंच पर आते तो लोग भी अलग जोश में आकर जावेद का स्वागत करते। गायकों के साथ-साथ एंकरिंग भी जबरदस्त हिस्सा मेले की अंतिम सांस्कृतिक संध्या की रही।
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संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी(बिलासपुर)। भराड़ी में तीन दिवसीय अजमेरपुर ग्रीष्मोत्सव की अंतिम सांस्कृतिक संध्या हिमाचली गायक ममता भारद्वाज और नाटी किंग सुरेश शर्मा के नाम रही। इन कलाकारों ने हिंदी, पंजाबी व पहाड़ी गीताें पर लोगों को खूब नचाया। अंतिम सांस्कृतिक संध्या में घुमारवीं के सतीश सोनी व इनके भाई रजत निशांत मुख्य रूप से मौजूद रहे।
कमेटी की तरफ से शाल, टोपी और स्मृति चिन्ह देकर मुख्य अतिथि को सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि ने दीप प्रज्वलन कर सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ किया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए मुख्य अतिथि ने 21 हजार रुपये व दंगल के विजेता पहलवानों को गुर्ज भेंट स्वरूप दिए। अंतिम सांस्कृतिक संध्या में हिमाचली गायिका ममता भारद्वाज ने तेरा मेरा प्यार सजना बचपना रा, साहिबां रिये बीबीये, पाणी री टांकी ओ भाई रामा, इना बड़ियां जो तुड़का लाणा ओ ठेकेदारनिये, इस गराएं देया लंबड़ा ओ इन्ना छोरुआ जो लेयां समझाई, तू मोई अछरिये तू मोई ओ, दिल धड़काये सिटी बजाए, तेरी आंखों का ये काजल मेरा दिल तड़फाये, मन्ने पल पल पल पल याद तेरी तड़फाये, कजो नैण मिलाए ओ जानी मेरिये, कितु ते आया मेरा रुण झुणुआं कितु ते आइयां दो जणीयां, मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है, इक मुंडा पंजाबी उदे नैन शराबी, दिल लै गई कुड़ी गुजरात दी, मेरे पीर दी जुगनी जुगनी जी, हुस्न पहाड़ों का क्या कहना कि बारों महीने यहां मौसम जाड़ों का गीत प्रस्तुत कर लोगों का मनोरंजन किया।
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वहीं हिमाचली नाटी किंग सुरेश शर्मा ने गोरा गोरा मुखड़ा तेरा देख्यो, भागवा पैनी साधु बणी जा, कानो रे झुमके छन छन करदे, नहीं सताण दिलडु अडीए इक्की दूजे रा, नाची नाची नाची रे सिरमौरी वालिये, तुम्हारी नजर क्यों खता हो गई आदि गीतों से उपस्थित दर्शकों को नाचने पर मजबूर कर दिया। इस मौके पर मेला कमेटी अध्यक्ष, मेला कमेटी सदस्य, कई पंचायतों के प्रतिनिधि व अन्य गण्यमान्य लोग उपस्थित रहे।
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जावेद की एंकरिंग ने दर्शकों का मन मोहा
ग्रीष्मोत्सव में पहली बार मंच संचालन के लिए बुलाए गए बिलासपुर के एंकर जावेद ने अपनी आवाज और शायरी के सभी लोग मुरीद हो गए। जाबेद ने कार्यक्रम में ऐसा रंग भरा कि जब भी बीच में वह मंच पर आते तो लोग भी अलग जोश में आकर जावेद का स्वागत करते। गायकों के साथ-साथ एंकरिंग भी जबरदस्त हिस्सा मेले की अंतिम सांस्कृतिक संध्या की रही।