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कण-कण में बसते हैं शिव : संगम भारती
Fri, 06 Feb 2026 11:07 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Fri, 06 Feb 2026 11:07 PM IST
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लक्ष्मी नारायण मंदिर बिलासपुर में शिव पुराण कथा के शुभारंभ पर शोभायात्रा निकालते श्रद्धालु। स्र
शिव महापुराण सनातन धर्म के 18 महापुराणों में से एक
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में शुक्रवार से श्री शिव महापुराण कथा का शुभारंभ हुआ। कथा के पहले दिन व्यास पीठ से महंत संगम भारती ने शिव महिमा का बखान करते हुए कहा कि इंसान शरीर से तो छुप सकता है, लेकिन परछाई से नहीं। क्योंकि परछाई में भी महादेव का ही वास है।
इससे पूर्व हनुमान मंदिर से भव्य कलश यात्रा निकाली गई। बैंड बाजों के साथ शिव महापुराण को गरिमामयी ढंग से मंदिर पहुंचाया गया, जहां विधि-विधान से पूजन के बाद पुराण की स्थापना की गई। जिला प्रशासन, मंदिर न्यास और शिव भक्तों के सहयोग से आयोजित इस समागम में भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। महंत संगम भारती ने कहा कि कलियुग में इंसान को भगवान को जानने का दुर्लभ मौका मिला है। उन्होंने बताया कि शिव कृपा से ही जीवन को आनंदमय बनाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए समर्पण का भाव जरूरी है। शिव की दृष्टि से कुछ भी छुपा नहीं है। शिव पुराण में स्वयं महादेव ने कहा है कि सब जगह मैं ही हूं, शरीर भी मैं हूं और परछाई भी मैं। इंसान अक्सर यह भूल कर बैठता है कि उसे कोई देख नहीं रहा, जबकि शिव अनंत हैं और सब उन्हीं में समाया है। कथावाचक ने बताया कि शिव महापुराण सनातन धर्म के 18 महापुराणों में से एक है। इसे सुनने मात्र से राजसूय और सौ अग्निष्टोम यज्ञों के समान पुण्य प्राप्त होता है। यह मनुष्य को सभी सांसारिक बंधनों से मुक्त कर कष्टों को हर लेता है। कथा के पहले दिन श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की आरती की और प्रसाद ग्रहण किया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में शुक्रवार से श्री शिव महापुराण कथा का शुभारंभ हुआ। कथा के पहले दिन व्यास पीठ से महंत संगम भारती ने शिव महिमा का बखान करते हुए कहा कि इंसान शरीर से तो छुप सकता है, लेकिन परछाई से नहीं। क्योंकि परछाई में भी महादेव का ही वास है।
इससे पूर्व हनुमान मंदिर से भव्य कलश यात्रा निकाली गई। बैंड बाजों के साथ शिव महापुराण को गरिमामयी ढंग से मंदिर पहुंचाया गया, जहां विधि-विधान से पूजन के बाद पुराण की स्थापना की गई। जिला प्रशासन, मंदिर न्यास और शिव भक्तों के सहयोग से आयोजित इस समागम में भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। महंत संगम भारती ने कहा कि कलियुग में इंसान को भगवान को जानने का दुर्लभ मौका मिला है। उन्होंने बताया कि शिव कृपा से ही जीवन को आनंदमय बनाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए समर्पण का भाव जरूरी है। शिव की दृष्टि से कुछ भी छुपा नहीं है। शिव पुराण में स्वयं महादेव ने कहा है कि सब जगह मैं ही हूं, शरीर भी मैं हूं और परछाई भी मैं। इंसान अक्सर यह भूल कर बैठता है कि उसे कोई देख नहीं रहा, जबकि शिव अनंत हैं और सब उन्हीं में समाया है। कथावाचक ने बताया कि शिव महापुराण सनातन धर्म के 18 महापुराणों में से एक है। इसे सुनने मात्र से राजसूय और सौ अग्निष्टोम यज्ञों के समान पुण्य प्राप्त होता है। यह मनुष्य को सभी सांसारिक बंधनों से मुक्त कर कष्टों को हर लेता है। कथा के पहले दिन श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की आरती की और प्रसाद ग्रहण किया।
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