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Bilaspur News: बिलासपुर में जश्न के बहाने कांग्रेस में शक्ति प्रदर्शन की तैयारी

Mon, 18 Nov 2024 11:25 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Mon, 18 Nov 2024 11:25 PM IST
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Preparation for show of strength in Congress on the pretext of celebration in Bilaspur
-कांग्रेस की एकजुटता का प्रदर्शन, भाजपा के गढ़ में होगी नई चुनौती
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-सीएम ने जिले के प्रमुख नेताओं को एक साथ बुलाकर दिया मजबूत संदेश

सरोज पाठक
बिलासपुर। प्रदेश की कांग्रेस सरकार के दो साल पूरे होने पर 11 दिसंबर 2024 को होने वाला जश्न अब केवल एक सरकारी उत्सव नहीं बल्कि प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत बन चुका है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में यह कार्यक्रम भाजपा के गढ़ बिलासपुर में कांग्रेस की एकजुटता को साबित करने का अवसर बन सकता है।
मुख्यमंत्री ने शिमला में कांग्रेस पार्टी के जिले के प्रमुख नेताओं को एक साथ बुलाकर एक मजबूत संदेश दिया है कि कांग्रेस में वर्चस्व की लड़ाई खत्म हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने अपने मंत्रिमंडल के वरिष्ठ नेता मंत्री राजेश धर्माणी, पूर्व मंत्री रामलाल ठाकुर, पूर्व विधायक बंबर ठाकुर, और झंडूता से कांग्रेस प्रत्याशी रहे विवेक कुमार को शिमला में एक बैठक में शामिल किया। यह बैठक न केवल सरकार की दो साल की उपलब्धियों का जश्न मनाने के लिए थी, बल्कि इसका राजनीतिक उद्देश्य भी है। बिलासपुर से वर्तमान में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा केंद्र सरकार के बड़े मंत्री हैं। वहीं जिले के चार विधान सभा क्षेत्रों में से तीन में भाजपा के विधायक जीत कर विधान सभा पहुंचे हैं। अभी तक कांग्रेस के दो बड़े नेताओं में चल रही वर्चस्व की लड़ाई से पार्टी को नुकसान ही हुआ है। इस लड़ाई में कांग्रेस को गत विस चुनाव में जिले से दो सीट का नुकसान भी झेलना पड़ा है। लेकिन अब नड्डा के गृह जिले में सीएम कांग्रेस को मजबूत करने की रणनीति तय करते नजर आ रहे हैं।
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क्या जश्न, क्या राजनीति : 11 दिसंबर को एक नई कहानी
11 दिसंबर को बिलासपुर में होने वाला यह जश्न अब राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करने वाला बन सकता है। मुख्यमंत्री द्वारा कांग्रेस के नेताओं को एकजुट करने का कदम यह दिखा रहा है कि वे अपनी पार्टी को एक मजबूत पक्ष के रूप में प्रस्तुत करना चाहते हैं। अब देखना होगा कि इस जश्न का असर वास्तविक राजनीति पर कैसे पड़ता है और क्या यह कांग्रेस के लिए जिले में एक निर्णायक मोड़ साबित होता है।
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वर्चस्व की लड़ाई खत्म, अब एकजुट कांग्रेस का संदेश
सदर और श्री नयना देवी विधानसभा क्षेत्रों के दो प्रमुख कांग्रेस नेता, जो पिछले कई वर्ष से अपने वर्चस्व को लेकर एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते रहे हैं, इस बैठक में एक साथ दिखे। हालांकि विस चुनाव के बाद यह दोनों नेता पहले भी साथ दिख चुके हैं। लेकिन सीएम की बैठक में दोनों का साथ होना ऐतिहासिक पल था, क्योंकि इन नेताओं के बीच की दूरियां और मतभेद पार्टी के भीतर अक्सर चर्चा का विषय बनते रहे हैं। अब मुख्यमंत्री ने इन नेताओं को एक साथ लाकर कांग्रेस की एकजुटता को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया है।

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चुनावों से पहले कांग्रेस की शक्ति का इजहार
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम जिले में कांग्रेस पार्टी की मजबूती को दर्शाने के लिए उठाया गया है। मुख्यमंत्री का यह रणनीतिक कदम, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के गृह जिले में कांग्रेस के नेताओं की एकजुटता को देखना, राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन चुका है।
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