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राकेश ने तैयार किए मुस्की कपूर, हींग के औषधीय पौधे

Fri, 11 Jun 2021 11:45 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 11 Jun 2021 11:45 PM IST
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plantation of medicine plants
बरठीं (बिलासपुर)। झंडूता विकासखंड की बरठीं पंचायत के टिकरी गांव में दर्जनों औषधीय पौधे तैयार कर गांव के एक व्यक्ति ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जो पौधे तमिलनाडु सहित अन्य प्रदेशों में पाए जाते हैं। उन्हें यहां की जलवायु में तैयार कर दिखाया है। औषधीय पौधों में मौजूदा समय में हवा में मौजूद भारी धातु के कण, प्रदूषित तत्व स्वास्थ्य के लिए मुसीबत बने हुए हैं। साथ ही पानी में भी मिलावट बढ़ने से बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।
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प्रदूषण को लेकर अमूमन पौधे लगाने की बात होती है, लेकिन औषधीय पौधे भी पर्यावरण को स्वच्छ रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। कुदरत के दिए गए वरदानों में पेड़ पौधों का महत्वपूर्ण स्थान है। बरठीं पंचायत के टिकरी गांव निवासी डायमंड किंग राकेश कुमार नड्डा ने स्वयं प्रेरणा से अपने खेतों में चंपा, चमेली, गंधार, रुद्राक्ष, मुस्की कपूर, हींग, रजनीगंधा, काला अंगूर, सीताफल, चीकू, जपानी अमरूद, तेजपत्र, मौसम्मी, अंजीर, बिना गुठली की बेरी, अमेरिकन बाबू कोसा, काला अंगूर सहित अन्य औषधीय फलदार पौधे उगाए हैं। नड्डा ने बताया कि कुछ पौधे तमिलनाडु और बाहरी प्रदेशों में होते हैं, जिन को यहां पर उगाया गया है। उन्होंने बताया कि जंगलों से ये प्रजातियां विलुप्त हो रही हैं। इन्हें संजोकर रखना हम सभी का कर्तव्य है। उन्होंने बताया कि इन औषधीय पौधों का अथर्ववेद में वर्णन मिलता है। उन्होंने बताया कि चंपा और गंधार रजनीगंधा पौधों की सुगंध 2 किलोमीटर दूर तक जाती है। इससे कई बीमारियों का नाश होता है ये यह सभी पौधे मानव जीवन के लिए संजीवनी बूटी के समान हैं।
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उन्होंने बताया कि औषधीय पौधे न केवल अपना औषधीय महत्व रखते हैं, बल्कि यह आय का भी एक जरिया बन जाते हैं। हमारे शरीर को निरोगी बनाए रखने में औषधीय पौधों का अत्यधिक महत्व होता है। यही वजह है कि भारतीय पुराणों, उपनिषदों, रामायण एवं महाभारत जैसे प्रमाणिक ग्रंथों में इसके उपयोग के अनेक साक्ष्य मिलते हैं। इस संदर्भ में कृषि विज्ञान केंद्र बरठी के प्रभारी डॉ. सुमन ने बताया कि इस प्रकार के औषधीय पौधों की खेती किसानों के लिए बहुत फायदेमंद हो सकती है। उन्होंने बताया कि ये औषधीय पौधे मानव जीवन के लिए बहुत ही उपयोगी हैं।
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