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पांचवे दिन भी जारी रहा एसीसी विस्थापितों और प्रभावितों का अनिश्चितकालीन धरना

Fri, 23 Apr 2021 10:13 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 23 Apr 2021 10:13 PM IST
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People protesting in front of ACC factory gate even in rain, bilaspur news
एसीसी बरमाणा के बाहर धरने पर बैठे प्रभावित व बिटिया फाउंडेशन के पदाधिकारी। - फोटो : BILASPUR
बरमाणा(बिलासपुर)। मांगों को लेकर एसीसी विस्थापितों और प्रभावितों का अनिश्चितकालीन धरना पांचवें दिन में प्रवेश कर गया है। शुक्रवार को भी बिटिया फाउंडेशन के बैनर तले विस्थापित व प्रभावित बरमाणा में एसीसी फैक्टरी के गेट के सामने धरने पर डटे रहे। इसमें महिलाओं की संख्या उल्लेखनीय रही। हालांकि पिछले 4 दिनों से मौसम के बिगड़े हुए मिजाज उनकी परीक्षा ले रहे थे लेकिन अब मूसलाधार बारिश और तेज हवाओं ने भी एक तरह से हार मान ली। शुक्रवार को दोपहर बाद के समय धूप खिलने से मौसम खुशगवार हो गया।
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धरने की अगुवाई कर रही बिटिया फाउंडेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष सीमा सांख्यान ने कहा कि एसीसी विस्थापित और प्रभावित अपने हकों के लिए आवाज बुलंद कर रहे हैं। लगातार अनदेखी के चलते उन्हें अपने घर और कामकाज छोड़कर यहां धरने पर बैठने पर मजबूर होना पड़ा है। हक की इस लड़ाई में महिलाएं भी बढ़चढ़ कर भाग ले रही हैं। प्रतिकूल मौसम में वे दिन-रात धरने पर डटी हैं। लेकिन 5 दिन बीत जाने के बाद भी प्रशासन अथवा एसीसी प्रबंधन ने उनकी सुध लेने की जहमत नहीं उठाई है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि महिलाओं की सुरक्षा और उनके मान-सम्मान की उन्हें कितनी चिंता है।
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सीमा सांख्यान ने कहा कि एसीसी प्रबंधन ने फैक्टरी के लिए बरमाणा तथा आसपास की पंचायतों के लोगों की जमीन कौड़ियों के भाव हासिल कर ली। इसके एवज में मिले नाममात्र मुआवजे से विस्थापित न तो सही ढंग से मकान बना पाए और न ही किसी अन्य स्थान पर जमीन खरीद पाए। शुरुआत में विस्थापितों को फैक्टरी में नौकरी दी गई थी लेकिन रिटायरमेंट के बाद उनके बच्चों को रोजगार नहीं दिया जा रहा है। इसके विपरीत दूसरे राज्यों के लोगों को नौकरी दी जा रही है। एसीसी प्रबंधन ने ऊंची चारदीवारी बनाकर विस्थापितों व प्रभावितों का रास्ता भी बंद कर दिया है। प्रदूषण की मार स्थानीय लोग सह रहे हैं लेकिन अन्य स्थानों की तुलना में उन्हें सीमेंट महंगा मिल रहा है। उनके सब्र का बांध अब टूटने लगा है। वे अपना हक लेकर ही रहेंगे। उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुई तो प्रबंधन को इसका खामियाजा भुगतने के लिए तैयार रहना होगा।
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