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विस्थापितों को कब्जे वाली जमीन का दिया जाए मालिकाना हक

Thu, 04 Mar 2021 11:49 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 04 Mar 2021 11:49 PM IST
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Ownership should be given to the displaced land
भगेड़ (बिलासपुर)। जिला ग्रामीण भाखड़ा विस्थापित सुधार समिति ने प्रदेश सरकार से भाखड़ा विस्थापितों की समस्याओं को सुलझाने के लिए शीघ्र कदम उठाने की मांग की है। समिति के प्रधान देशराज शर्मा ने कहा है कि प्रदेश सरकार मौजूदा विधानसभा सत्र में उनकी मांगों को पूरा करने के लिए कदम उठाए। विस्थापितों की कब्जे वाली जमीन का मालिकाना हक उन्हें प्रदान किया जाए।
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उन्होंने कहा कि 9 अगस्त 1960 को बनी पहली कृत्रिम झील गोविंद सागर से बेघर हुए लोगों को आज भी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पाई हैं। पिछले 60 वर्षों से लोग अपने बसाव की राह ताक रहे हैं। विस्थापितों को हर बार कोरे आश्वासन ही मिले। हर पांच वर्ष बाद होने वाले लोकसभा व विधानसभा चुनावों के समय नेताओं को विस्थापितों की याद जरूर आती है और सत्ता मिलने पर विस्थापितों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करने के दावे किए जाते हैं। लेकिन सत्ता मिलने के बाद विस्थापितों को भूल जाते हैं, जिस कारण आज भी विस्थापितों का पूरी तरह बसाव नहीं हो पाया है। समिति के प्रधान देसराज शर्मा ने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा संबंधित विस्थापितों की जमीनों को अवैध करार देकर करीब सैकड़ों लोगों के बिजली व पानी के कनेक्शन काटे जा चुके हैं। बिलासपुर शहर में भी करीब 345 लोगों को प्लाट नहीं मिल पाए हैं।
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प्रदेश सरकार ने आज तक भाखड़ा विस्थापित क्षेत्र का बंदोबस्त नहीं करवाया।
विस्थापितों की कब्जे वाली जमीन का मालिकाना हक उन्हें प्रदान किया जाए। क्षेत्र के विधायक ने कई बार मिनी सेटलमेंट करवाने की बात कही है। उन्होंने विस्थापितों के काटे गए कनेक्शनों को बहाल करने, विस्थापितों को मुफ्त में बिजली दिए जाने, विस्थापितों व प्रभावितों को झील से पेयजल व सिंचाई का पानी उपलब्ध करवाए जाने, विस्थापितों के बच्चों को बीबीएमबी में नौकरियों में आरक्षण दिए जाने, जिन विस्थापितों को प्लाट नहीं मिले हैं उन्हें प्लाट दिए जाने और गोविंद सागर पर भजवाणी में पुल बनाए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि गोविंद सागर झील के अस्तित्व में आने से पहले राजाओं के समय यही एक मात्र पुल था। जिसका अस्तित्व झील बनने के बाद समाप्त हो गया था। उन्होंने गोविंद सागर झील को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किए जाने की मांग भी की है।
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