{"_id":"62b0c1aa4e218162f9306eae","slug":"no-food-facility-in-bilaspur-hospital-people-facing-problem-bilaspur-news-sml412771393","type":"story","status":"publish","title_hn":"अस्पताल की कैंटीन में खाना नहीं मिलने से तीमारदारों, मरीजों और स्टाफ परेशान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अस्पताल की कैंटीन में खाना नहीं मिलने से तीमारदारों, मरीजों और स्टाफ परेशान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिलासपुर। क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर की कैंटीन में खाना नहीं मिल रहा है। इससे तीमारदारों, मरीजों और स्टाफ को परेशानी हो रही है। चेकअप के लिए आए मरीजों, तीमारदारों और स्टाफ सदस्यों को भोजन के लिए बाजार जाना पड़ रहा है।
अस्पताल की कैंटीन को कुछ दिन पहले हॉल से एक कमरे में शिफ्ट कर दिया है। इसके बाद से ही कैंटीन संचालक ने खाना बनाना बंद कर दिया। अभी कैंटीन में सिर्फ चाय, पकौड़े और पेय पदार्थ ही मिल रहे हैं। कैंटीन संचालक का कहना है कि उनके पास लोगों को बिठाने के लिए जगह नहीं है। इसलिए वह खाना नहीं बना रहे हैं।
अस्पताल में रोजाना 500 से 800 की ओपीडी होती है। कई मरीज घरों से भूखे पेट स्वास्थ्य जांच करवाने आते है। टेस्ट आदि करवाने के बाद वह कैंटीन में ही भोजन करते थे, लेकिन ऐसे मरीजों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। वहीं अस्पताल में दाखिल मरीजों के तीमारदारों और स्टाफ को बस अड्डा बाजार या फिर मेन मार्केट में जाना पड़ रहा है।
विज्ञापन
बता दें कि जिस हॉल में कैंटीन को चलाया जाता था, वहां अब शव गृह को विकसित किया जाएगा। इसके चलते कैंटीन को साथ में ही एक कमरे में शिफ्ट किया गया है। नई कैंटीन का भवन का निर्माण अस्पताल परिसर में ही किया जाएगा। तब तक कैंटीन अस्थायी कमरे से ही संचालित होगी।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजीव वर्मा ने कहा कि कैंटीन संचालक को एक अन्य कमरा दिया जाएगा। इसके बाद कैंटीन संचालक खाना बनाना शुरू कर देगा।
विज्ञापन
अस्पताल की कैंटीन को कुछ दिन पहले हॉल से एक कमरे में शिफ्ट कर दिया है। इसके बाद से ही कैंटीन संचालक ने खाना बनाना बंद कर दिया। अभी कैंटीन में सिर्फ चाय, पकौड़े और पेय पदार्थ ही मिल रहे हैं। कैंटीन संचालक का कहना है कि उनके पास लोगों को बिठाने के लिए जगह नहीं है। इसलिए वह खाना नहीं बना रहे हैं।
विज्ञापन
अस्पताल में रोजाना 500 से 800 की ओपीडी होती है। कई मरीज घरों से भूखे पेट स्वास्थ्य जांच करवाने आते है। टेस्ट आदि करवाने के बाद वह कैंटीन में ही भोजन करते थे, लेकिन ऐसे मरीजों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। वहीं अस्पताल में दाखिल मरीजों के तीमारदारों और स्टाफ को बस अड्डा बाजार या फिर मेन मार्केट में जाना पड़ रहा है।
विज्ञापन
बता दें कि जिस हॉल में कैंटीन को चलाया जाता था, वहां अब शव गृह को विकसित किया जाएगा। इसके चलते कैंटीन को साथ में ही एक कमरे में शिफ्ट किया गया है। नई कैंटीन का भवन का निर्माण अस्पताल परिसर में ही किया जाएगा। तब तक कैंटीन अस्थायी कमरे से ही संचालित होगी।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजीव वर्मा ने कहा कि कैंटीन संचालक को एक अन्य कमरा दिया जाएगा। इसके बाद कैंटीन संचालक खाना बनाना शुरू कर देगा।