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नौ अस्पतालों में नहीं डॉक्टर, तीन पर लटके ताले
ब्यूरो/ अमर उजाला, बिलासपुर
Updated Mon, 23 Nov 2015 06:31 PM IST
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स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर सुविधाएं मुहैया करवाने के सरकारी दावे जमीनी स्तर पर खोखले साबित हो रहे हैं। हालात यह है कि जिला के दुर्गम इलाकों में खोले गए अस्पताल बिना चिकित्सक के चल रहे हैं।
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लगभग 150 से अधिक गांवों को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया करवाने वाले नौ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डाक्टर ही नहीं है। इस वजह से लोगों को उपचार के लिए कई किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय आना पड़ता है।
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सबसे अधिक परेशानी आपात परिस्थितियों में आती है। जिला के बड़ेतर, मलोखर और ऋषिकेश स्थित पीएचसी में इन दिनों कोई भी चिकित्सक तैनात नहीं है। इसके कारण लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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इन तीनों अस्पतालों में न तो चिकित्सक है और न ही फार्मासिस्ट। इसके अलावा नम्होल, पंजगाईं, स्वारघाट, तरसूह, मल्यावर और कुठेड़ा में भी चिकित्सक न होने की वजह से ग्रामीण उपचार के लिए भटक रहे हैं।
मजबूरी में लोगों को जिला अस्पताल या फिर निजी अस्पतालों में अपना इलाज करवाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब चिकित्सक ही नहीं है तो पीएचसी आखिर खोली क्यों गई है।
कई जगह तो दवाइयां बांटने वाला भी नहीं है। ग्रामीण बसंत राम, रूप लाल ठाकुर, प्रेम लाल चौधरी, देवेंद्र ठाकुर, उत्तम राम ने बताया कि पीएचसी में डॉक्टर न होने से लोगों को दिक्कतें झेलनी पड़ रही है। अगर कोई गांव में बीमार हो जाए तो उसे प्राथमिक उपचार तक की सुविधा नहीं है।
हर पीएचसी पर 25 गांव का बोझ
ग्रामीण क्षेत्रों में खोली गई इन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में तीन में चार पंचायतों के ग्रामीण उपचार के लिए आते हैं। इस तरह से एक पीएचसी पर करीब 25 गांव निर्भर करते हैं। लेकिन, डॉक्टर न होने से यह स्वास्थ्य केंद्र लोगों के किसी काम नहीं आ रह हैं। भड़ेतर अस्पताल में तो लगभग एक साल से चिकित्सक नहीं पहुंचा। जबकि ऋषिकेश में भी पांच महीने से चिकित्सक का पद खाली चल रहा है।
जिला अस्पताल पर भी बढ़ रहा दबाव
पीएचसी में चिकित्सक नहीं होने के कारण जिला अस्पताल में मरीजों का दबाव बढ़ रहा है। अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे चिकित्सकों पर भी काम का बोझ बढ़ रहा है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. वीके चौधरी ने बताया कि जिला की नौ पीएचसी में चिकित्सक नहीं है। कहीं पर फार्मासिस्ट तैनात किए गए हैं तो कहीं डेपुटेशन पर सप्ताह में तीन दिन चिकित्सक भेजे जा रहे हैं। ताकि मरीजों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े।