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Bilaspur News: गुग्गा जाहरवीर मंदिर छिबर में लगाया जलेबी का भंडारा
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गुग्गा दशमी पर आयोजित हुआ मेला
संवाद न्यूज एजेंसी
भगेड़ (बिलासपुर)। घुमारवीं की फटोह पंचायत के गुग्गा जाहरवीर मंदिर छिबर में गुग्गा दशमी पर एक दिवसीय मेले का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जलेबी का भंडारा लगाया गया। इसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
सुबह से ही छिबर, रोपा, सारटी, टाकरेड़ा, तरौतड़ा, बल्लू और आसपास के कई गांवों से श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच मंदिर पहुंचकर माथा टेकते रहे। परंपरा के अनुसार श्रद्धालु विशेष रूप से रोट बनाकर गुग्गा जाहरवीर महाराज को अर्पित करते हैं। यह परंपरा गांव में बुजुर्गों के समय से निरंतर चली आ रही है।
भक्तों ने गुग्गा जाहरवीर महाराज की गाथाओं को सुनकर अपने जीवन को धन्य माना। इस अवसर पर मंदिर समिति और ग्रामीणों की ओर से धार्मिक अनुष्ठान किए गए। श्रद्धालुओं की सेवा के लिए इस बार विशेष रूप से जलेबी का भंडारा रखा गया, जिसका लोगों ने भरपूर आनंद लिया।
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आयोजन के दौरान गुग्गा जाहरवीर महाराज की जीवन गाथा और उनके लोक कल्याणकारी कार्यों का भी उल्लेख किया गया। मंदिर समिति के प्रधान सूबेदार सुखजीत सिंह ने बताया कि गुग्गा दशमी का यह मेला गांव की आस्था और परंपरा का प्रतीक है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
भगेड़ (बिलासपुर)। घुमारवीं की फटोह पंचायत के गुग्गा जाहरवीर मंदिर छिबर में गुग्गा दशमी पर एक दिवसीय मेले का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जलेबी का भंडारा लगाया गया। इसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
सुबह से ही छिबर, रोपा, सारटी, टाकरेड़ा, तरौतड़ा, बल्लू और आसपास के कई गांवों से श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच मंदिर पहुंचकर माथा टेकते रहे। परंपरा के अनुसार श्रद्धालु विशेष रूप से रोट बनाकर गुग्गा जाहरवीर महाराज को अर्पित करते हैं। यह परंपरा गांव में बुजुर्गों के समय से निरंतर चली आ रही है।
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भक्तों ने गुग्गा जाहरवीर महाराज की गाथाओं को सुनकर अपने जीवन को धन्य माना। इस अवसर पर मंदिर समिति और ग्रामीणों की ओर से धार्मिक अनुष्ठान किए गए। श्रद्धालुओं की सेवा के लिए इस बार विशेष रूप से जलेबी का भंडारा रखा गया, जिसका लोगों ने भरपूर आनंद लिया।
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आयोजन के दौरान गुग्गा जाहरवीर महाराज की जीवन गाथा और उनके लोक कल्याणकारी कार्यों का भी उल्लेख किया गया। मंदिर समिति के प्रधान सूबेदार सुखजीत सिंह ने बताया कि गुग्गा दशमी का यह मेला गांव की आस्था और परंपरा का प्रतीक है।