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Bilaspur News: मानसिक क्रूरता और परित्याग के आरोप सिद्ध, पति को मिला तलाक
Wed, 03 Jun 2026 11:38 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Wed, 03 Jun 2026 11:38 PM IST
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अदालत से
फैमिली कोर्ट ने मानसिक क्रूरता और छह साल के परित्याग को माना आधार
दहेज उत्पीड़न व घरेलू हिंसा के आरोप भी रहे विवाद का हिस्सा
चाय बेचकर परिवार का पालन पोषण करता था पति ,पत्नी करती थी झगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। घुमारवीं उपमंडल के मसौर गांव से जुड़े एक वैवाहिक विवाद में जिला फैमिली कोर्ट बिलासपुर ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए करीब 18 वर्ष पुराने विवाह को समाप्त कर दिया है। अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश, फैमिली कोर्ट बिलासपुर नविश भारद्वाज ने अपने निर्णय में पति द्वारा लगाए गए मानसिक क्रूरता और परित्याग के आरोपों को सिद्ध मानते हुए तलाक की डिक्री पारित की।
अदालत में दायर याचिका के अनुसार दोनों का विवाह 4 नवंबर 2008 को झंडूता क्षेत्र के सेर गांव में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुआ था। इस विवाह से एक पुत्र का जन्म हुआ, जो याचिका दायर किए जाने के समय 13 वर्ष का था। याचिका में पति ने कहा कि विवाह के आरंभ से ही पत्नी का व्यवहार वैवाहिक जीवन के अनुकूल नहीं था। वह अक्सर छोटी-छोटी बातों को लेकर विवाद करती थी और घर का माहौल खराब करती थी। पति का आरोप था कि पत्नी को विलासिता पूर्ण जीवन जीने का शौक था और वह उसकी कमजोर आर्थिक स्थिति से असंतुष्ट रहती थी। पति ने अदालत को बताया कि वह चाय बेचने का कार्य करता है और सीमित आय में परिवार का पालन-पोषण करता रहा। इसके बावजूद पत्नी बार-बार बिना किसी कारण मायके चली जाती थी और लंबे समय तक वापस नहीं लौटती थी। परिवार और रिश्तेदारों द्वारा कई बार समझौते के प्रयास किए गए, लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला। याचिका में यह भी कहा गया कि पत्नी अक्सर झगड़े के दौरान बर्तन फेंकती थी, मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना देती थी तथा दहेज उत्पीड़न के झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देती थी। पति ने आरोप लगाया कि जनवरी 2020 में पत्नी बिना किसी उचित कारण के घर छोड़कर चली गई और उसके बाद वापस नहीं लौटी। दूसरी ओर पत्नी ने अपने जवाब में पति और उसके माता-पिता पर गंभीर आरोप लगाए थे। उसने कहा था कि शादी के दो-तीन महीने बाद ही उससे दहेज को लेकर ताने दिए जाने लगे। पति और उसके परिजन गाली-गलौज करते थे और उसके गरीब परिवार द्वारा दिए गए दहेज को लेकर अपमानित करते थे। पत्नी ने अदालत को बताया कि 24 जून 2009 को उसने दहेज प्रताड़ना और मारपीट की शिकायत की थी, जिसके बाद 30 जून 2009 को दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ था। उसने यह भी कहा कि कुछ वर्षों तक परिवार सामान्य रूप से चलता रहा, लेकिन बाद में फिर विवाद शुरू हो गए।
पत्नी का आरोप था कि 3 जनवरी 2020 को चाय में चीनी कम होने जैसी मामूली बात पर पति ने उसके साथ मारपीट की। जान का खतरा महसूस होने पर वह लोहड़ी मेले का बहाना बनाकर मायके चली गई। इसके बाद 14 जनवरी 2020 को महिला थाना बिलासपुर में शिकायत दर्ज करवाई, जिसके आधार पर पति और उसके माता-पिता के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। पत्नी ने यह भी कहा था कि कोविड-19 महामारी के दौरान पति ने न तो उसका और न ही बच्चे का हालचाल पूछा और आर्थिक सहायता भी नहीं दी। उसने अदालत को बताया कि घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत चल रहा मामला 11 मार्च 2023 को राष्ट्रीय लोक अदालत में समझौते के आधार पर निपटा था, जिसमें पति ने भरण-पोषण राशि देने पर सहमति जताई थी, लेकिन बाद में भुगतान नहीं किया। मामले की सुनवाई के दौरान पत्नी ने प्रारंभिक जवाब तो दाखिल किया, लेकिन बाद में नियमित रूप से अदालत में उपस्थित नहीं हुई। इसके चलते 25 अप्रैल 2024 को अदालत ने उसे एकपक्षीय घोषित कर दिया। उधर,पति ने अपने पक्ष में स्वयं गवाही दी। इसके अलावा एक स्थानीय व्यक्ति और अपनी वृद्ध माता को भी गवाह के रूप में पेश किया। गवाहों ने अदालत को बताया कि पत्नी छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा करती थी, परिवार को झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देती थी तथा वर्ष 2020 से अलग रह रही है। एक गवाह ने बयान दिया कि वर्ष 2022 में रिश्तेदारों का एक समूह पत्नी को वापस लाने गया था, लेकिन उसने लौटने से इनकार कर दिया। पति ने अदालत में घरेलू हिंसा अधिनियम से संबंधित शिकायत, पत्नी का बयान, राष्ट्रीय लोक अदालत का अवार्ड और आपराधिक मामले से जुड़े दस्तावेज भी प्रस्तुत किए। फैसले में अदालत ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच संबंध इतने खराब हो चुके हैं कि पुनर्मिलन की कोई संभावना नहीं बची है। रिश्ते को बचाने के लिए किए गए प्रयास भी सफल नहीं हुए। ऐसे में विवाह केवल कानूनी रूप से अस्तित्व में था, व्यवहारिक रूप से नहीं। इन सभी तथ्यों और साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए फैमिली कोर्ट ने विवाह को समाप्त करते हुए तलाक की डिक्री पारित कर दी। अदालत ने दोनों पक्षों को अपना-अपना खर्च स्वयं वहन करने के निर्देश दिए हैं।
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फैमिली कोर्ट ने मानसिक क्रूरता और छह साल के परित्याग को माना आधार
दहेज उत्पीड़न व घरेलू हिंसा के आरोप भी रहे विवाद का हिस्सा
चाय बेचकर परिवार का पालन पोषण करता था पति ,पत्नी करती थी झगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। घुमारवीं उपमंडल के मसौर गांव से जुड़े एक वैवाहिक विवाद में जिला फैमिली कोर्ट बिलासपुर ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए करीब 18 वर्ष पुराने विवाह को समाप्त कर दिया है। अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश, फैमिली कोर्ट बिलासपुर नविश भारद्वाज ने अपने निर्णय में पति द्वारा लगाए गए मानसिक क्रूरता और परित्याग के आरोपों को सिद्ध मानते हुए तलाक की डिक्री पारित की।
अदालत में दायर याचिका के अनुसार दोनों का विवाह 4 नवंबर 2008 को झंडूता क्षेत्र के सेर गांव में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुआ था। इस विवाह से एक पुत्र का जन्म हुआ, जो याचिका दायर किए जाने के समय 13 वर्ष का था। याचिका में पति ने कहा कि विवाह के आरंभ से ही पत्नी का व्यवहार वैवाहिक जीवन के अनुकूल नहीं था। वह अक्सर छोटी-छोटी बातों को लेकर विवाद करती थी और घर का माहौल खराब करती थी। पति का आरोप था कि पत्नी को विलासिता पूर्ण जीवन जीने का शौक था और वह उसकी कमजोर आर्थिक स्थिति से असंतुष्ट रहती थी। पति ने अदालत को बताया कि वह चाय बेचने का कार्य करता है और सीमित आय में परिवार का पालन-पोषण करता रहा। इसके बावजूद पत्नी बार-बार बिना किसी कारण मायके चली जाती थी और लंबे समय तक वापस नहीं लौटती थी। परिवार और रिश्तेदारों द्वारा कई बार समझौते के प्रयास किए गए, लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला। याचिका में यह भी कहा गया कि पत्नी अक्सर झगड़े के दौरान बर्तन फेंकती थी, मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना देती थी तथा दहेज उत्पीड़न के झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देती थी। पति ने आरोप लगाया कि जनवरी 2020 में पत्नी बिना किसी उचित कारण के घर छोड़कर चली गई और उसके बाद वापस नहीं लौटी। दूसरी ओर पत्नी ने अपने जवाब में पति और उसके माता-पिता पर गंभीर आरोप लगाए थे। उसने कहा था कि शादी के दो-तीन महीने बाद ही उससे दहेज को लेकर ताने दिए जाने लगे। पति और उसके परिजन गाली-गलौज करते थे और उसके गरीब परिवार द्वारा दिए गए दहेज को लेकर अपमानित करते थे। पत्नी ने अदालत को बताया कि 24 जून 2009 को उसने दहेज प्रताड़ना और मारपीट की शिकायत की थी, जिसके बाद 30 जून 2009 को दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ था। उसने यह भी कहा कि कुछ वर्षों तक परिवार सामान्य रूप से चलता रहा, लेकिन बाद में फिर विवाद शुरू हो गए।
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पत्नी का आरोप था कि 3 जनवरी 2020 को चाय में चीनी कम होने जैसी मामूली बात पर पति ने उसके साथ मारपीट की। जान का खतरा महसूस होने पर वह लोहड़ी मेले का बहाना बनाकर मायके चली गई। इसके बाद 14 जनवरी 2020 को महिला थाना बिलासपुर में शिकायत दर्ज करवाई, जिसके आधार पर पति और उसके माता-पिता के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। पत्नी ने यह भी कहा था कि कोविड-19 महामारी के दौरान पति ने न तो उसका और न ही बच्चे का हालचाल पूछा और आर्थिक सहायता भी नहीं दी। उसने अदालत को बताया कि घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत चल रहा मामला 11 मार्च 2023 को राष्ट्रीय लोक अदालत में समझौते के आधार पर निपटा था, जिसमें पति ने भरण-पोषण राशि देने पर सहमति जताई थी, लेकिन बाद में भुगतान नहीं किया। मामले की सुनवाई के दौरान पत्नी ने प्रारंभिक जवाब तो दाखिल किया, लेकिन बाद में नियमित रूप से अदालत में उपस्थित नहीं हुई। इसके चलते 25 अप्रैल 2024 को अदालत ने उसे एकपक्षीय घोषित कर दिया। उधर,पति ने अपने पक्ष में स्वयं गवाही दी। इसके अलावा एक स्थानीय व्यक्ति और अपनी वृद्ध माता को भी गवाह के रूप में पेश किया। गवाहों ने अदालत को बताया कि पत्नी छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा करती थी, परिवार को झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देती थी तथा वर्ष 2020 से अलग रह रही है। एक गवाह ने बयान दिया कि वर्ष 2022 में रिश्तेदारों का एक समूह पत्नी को वापस लाने गया था, लेकिन उसने लौटने से इनकार कर दिया। पति ने अदालत में घरेलू हिंसा अधिनियम से संबंधित शिकायत, पत्नी का बयान, राष्ट्रीय लोक अदालत का अवार्ड और आपराधिक मामले से जुड़े दस्तावेज भी प्रस्तुत किए। फैसले में अदालत ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच संबंध इतने खराब हो चुके हैं कि पुनर्मिलन की कोई संभावना नहीं बची है। रिश्ते को बचाने के लिए किए गए प्रयास भी सफल नहीं हुए। ऐसे में विवाह केवल कानूनी रूप से अस्तित्व में था, व्यवहारिक रूप से नहीं। इन सभी तथ्यों और साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए फैमिली कोर्ट ने विवाह को समाप्त करते हुए तलाक की डिक्री पारित कर दी। अदालत ने दोनों पक्षों को अपना-अपना खर्च स्वयं वहन करने के निर्देश दिए हैं।
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