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Bilaspur News: हाईकोर्ट सख्त, कंपनी को छह हफ्ते में जमा करने होंगे 56.62 लाख

Wed, 01 Apr 2026 11:42 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Wed, 01 Apr 2026 11:42 PM IST
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High Court strict, company will have to deposit Rs 56.62 lakh in six weeks
अदालत से
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पर्यावरण मुआवजा मामला : जुर्माना जमा किए बिना सुनवाई नहीं, अगली सुनवाई 18 मई

29.25 लाख पहले जमा, शेष राशि को लेकर जारी किए गए आदेश
पैसे जमा करने के लिए कोर्ट ने कंपनी को दिया आखिरी मौकेा

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में मदन लाल बनाम राज्य हिमाचल प्रदेश व अन्य मामले में पर्यावरण मुआवजे को लेकर चल रहे विवाद में अदालत ने सख्त रुख बरकरार रखते हुए मेसर्स दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड को शेष 56,62,500 रुपये जमा करने के लिए छह सप्ताह का अंतिम अवसर दिया है।

मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने बकाया राशि जमा करने के लिए समय मांगा। अदालत ने इस आग्रह को स्वीकार करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि अगली सुनवाई से पहले निर्धारित राशि जमा की जाए। इसके साथ ही मामले की सुनवाई 18 मई 2026 तक के लिए स्थगित कर दी गई। बता दें कि यह मामला पर्यावरण मुआवजे से जुड़ा है, जिसमें कंपनी पर जुर्माना लगाया गया था। इस संबंध में हाईकोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि जब तक कंपनी पूरी राशि जमा नहीं करती, तब तक उसकी दलीलों पर विचार नहीं किया जाएगा। अदालत ने 18 दिसंबर 2024 और 18 सितंबर 2025 के अपने आदेशों में भी यही टिप्पणी की थी कि जुर्माना न भरने की स्थिति में कंपनी को सुनवाई का अधिकार नहीं मिलेगा। पूर्व सुनवाई में कंपनी की ओर से दायर हलफनामे में बताया गया था कि उसने 20 जुलाई 2024 को 29,25,000 रुपये जमा किए थे, लेकिन यह राशि विरोध और दबाव में दी गई थी। कंपनी ने पर्यावरण मुआवजे के आदेश को चुनौती देते हुए 31 दिसंबर 2025 को अलग से सिविल रिट याचिका भी दायर की है। हाईकोर्ट ने कंपनी की नई याचिका को मुख्य जनहित याचिका के साथ जोड़ते हुए संयुक्त रूप से सुनवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी कहा गया था कि यदि कंपनी मामले की मेरिट पर सुनवाई चाहती है, तो उसे बकाया राशि अदालत में जमा करनी होगी। ताजा आदेश में अदालत द्वारा छह सप्ताह का समय दिए जाने के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि कंपनी को हर हाल में बकाया राशि जमा करनी होगी। ऐसे में 18 मई 2026 को होने वाली अगली सुनवाई इस मामले में अहम मानी जा रही है, जहां यह देखा जाएगा कि कंपनी कोर्ट के निर्देशों का पालन करती है या नहीं। मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार, केंद्र सरकार सहित सभी संबंधित पक्षों के अधिवक्ता अदालत में उपस्थित रहे।
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