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जिले में एचआईबी संक्रमण के 11 नए मामले सामने आए
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बिलासपुर। तमाम प्रचार-प्रसार के बाद भी जिले में एचआईवी के मामले कम होने की जगह बढ़ते जा रहे हैं। मार्च के बाद जिला अस्पताल में की गई एचआईवी जांच में 11 मामले बढ़ने की पुष्टि हुई है। जिला अस्पताल में उक्त 11 मामले अलग-अलग जगह से आए हैं जिनमें स्त्री और पुरुष दोनों शामिल हैं लेकिन इसमें पुरुषों का आंकड़ा ज्यादा है।
इस वर्ष अप्रैल से सितंबर तक अस्पताल में एचआईवी के 11 मामले पहुंचे हैं। इनमें 9 पुरुष और 2 महिलाएं शामिल हैं। मार्च 2019 में जिले में यह आंकड़ा 239 के करीब था लेकिन सितंबर तक पहुंचते हुए यह बढ़कर 255 हो गया जो कि चिंता का विषय है। एचआईवी की रोकथाम के लिए सरकार की ओर से हर स्तर पर कई तरह के जागरूकता शिविरों का आयोजन समय-समय पर करवाया जाता है। वहीं जिला स्तर पर स्वास्थ्य विभाग कई तरह के प्रचार प्रसार अभियान आयोजित करता है ताकि लोगों को एचआईवी के पति जागरूक किया जा सके लेकिन जिले में बढ़ते हुए मामलों को देखकर प्रतीत होता है कि लोग अभी भी इसके प्रति पूरी तरह जागरूक नहीं हुए हैं।
एड्स पर जागरूक करने और इलाज के लिए जिला स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण एसोसिएशन से करोड़ों रुपये की मदद मिलती है। इसके तहत प्रचार सामग्री को बांटकर और अन्य जागरूकता कार्यक्रमों से बचाव के लिए खूब प्रचार किया जाता है। बावजूद इसके इस बीमारी से संक्रमित लोगों के आंकड़ों का बढ़ना इस अभियान की कमजोरी को दर्शाता है।
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परिवार कल्याण विभाग के वरिष्ठ सचिव संजय ने बताया कि जिले में लोगों को समय-समय पर एचआईवी के प्रति जागरूक किया जाता है। उन्होंने कहा कि जिले में एचआईवी से ग्रसित मरीजों को समय पर दवाई उपलब्ध करवाई जा रही है। विभाग गांव-गांव जाकर लोगों को लगातार जागरूक कर रहा है ताकि लोगों को इससे बचाया जा सके।
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इस वर्ष अप्रैल से सितंबर तक अस्पताल में एचआईवी के 11 मामले पहुंचे हैं। इनमें 9 पुरुष और 2 महिलाएं शामिल हैं। मार्च 2019 में जिले में यह आंकड़ा 239 के करीब था लेकिन सितंबर तक पहुंचते हुए यह बढ़कर 255 हो गया जो कि चिंता का विषय है। एचआईवी की रोकथाम के लिए सरकार की ओर से हर स्तर पर कई तरह के जागरूकता शिविरों का आयोजन समय-समय पर करवाया जाता है। वहीं जिला स्तर पर स्वास्थ्य विभाग कई तरह के प्रचार प्रसार अभियान आयोजित करता है ताकि लोगों को एचआईवी के पति जागरूक किया जा सके लेकिन जिले में बढ़ते हुए मामलों को देखकर प्रतीत होता है कि लोग अभी भी इसके प्रति पूरी तरह जागरूक नहीं हुए हैं।
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एड्स पर जागरूक करने और इलाज के लिए जिला स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण एसोसिएशन से करोड़ों रुपये की मदद मिलती है। इसके तहत प्रचार सामग्री को बांटकर और अन्य जागरूकता कार्यक्रमों से बचाव के लिए खूब प्रचार किया जाता है। बावजूद इसके इस बीमारी से संक्रमित लोगों के आंकड़ों का बढ़ना इस अभियान की कमजोरी को दर्शाता है।
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परिवार कल्याण विभाग के वरिष्ठ सचिव संजय ने बताया कि जिले में लोगों को समय-समय पर एचआईवी के प्रति जागरूक किया जाता है। उन्होंने कहा कि जिले में एचआईवी से ग्रसित मरीजों को समय पर दवाई उपलब्ध करवाई जा रही है। विभाग गांव-गांव जाकर लोगों को लगातार जागरूक कर रहा है ताकि लोगों को इससे बचाया जा सके।