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कीरतपुर-मनाली फोरलेन में चार गुना मुआवजा देने से सरकार ने पीछे खींचे हाथ

Thu, 15 Jul 2021 11:33 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 15 Jul 2021 11:33 PM IST
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Government pulled back by giving four times compensation in Kiratpur-Manali four lane, Due to the overthrow of the government, there was a huge fury in the Fourlane Joint Conflict Committee, warned of agitation
बिलासपुर। सरकार द्वारा फोरलेन में चार गुना मुआवजा देने के चुनावी वादे से मुकरने पर किसान सामूहिक संघर्ष के लिए तैयार हैं। फोरलेन संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष जोगिंद्र वालिया ने कहा कि बुधवार को शिमला में कीरतपुर-मनाली फोरलेन से संबंधित लंबित शिकायतों के निपटारे के लिए शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर की अध्यक्षता में गठित सब कमेटी की बैठक की गई। जिसमें सरकार ने फोरलेन में चार गुना मुआवजा देने से अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं।
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संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष जोगिंद्र वालिया, जड़ोल-पुंघ से राजकुमार वर्मा, नोलखा-डडोर से जितेंद्र, डडौर-नागचाला से भूप सिंह सकलानी, बिंद्राबनी-नागचला से मोहन ठाकुर, बिंद्राबनी-पंडोह से बीरबल, फोरलेन प्रभावित किसान संघ बजौरा से नरेश कुकू, संयुक्त संघर्ष समिति कुल्लू से मोहिंदर ठाकुर, दिनेश सेन, किसान सभा कुल्लू इकाई के अध्यक्ष होतम सोख्ला, फोरलेन प्रभावित किसान संघ बिलासपुर के अध्यक्ष मदनलाल शर्मा, बल्ह बचाओ किसान संघर्ष समिति के सचिव नंद लाल वर्मा ने कहा कि तीन वर्ष बीत जाने के बावजूद हिमाचल सरकार कोई फैसला नहीं ले पाई है। उन्होंने मांग की है कि हिमाचल सरकार फोरलेन में भूमि अधिग्रहण 2013 कानून पुनर्स्थापना, पुनर्वासन, चार गुना मुआवजा को लागू करे, अन्यथा सभी किसान एक साथ मिलकर आने वाले दिनों में संघर्ष को तेज करेंगे। प्रस्तावित फोरलेन में आर्बिट्रेशन मामले 3 साल मंडलीय न्यायालय में लंबित पड़े हैं और कोई सुनवाई नहीं हो रही है। दूसरी तरफ नगर एवं ग्राम योजना (टीसीपी) को सरकार ने लागू कर दिया। नगर ग्राम योजना के अंतर्गत प्रस्तावित फोरलेन के साथ लगते गांवों को टीसीपी योजना से निरस्त किया जाए। वहीं संघर्ष समिति ने राष्ट्रीय उच्चमार्ग प्राधिकरण से मांग की कि फोरलेन की एवज में बचे हुए जमीन व मकान के अवार्ड घोषित किए जाएं। अन्य मुद्दों पर भी एनएचएआई जल्द विचार कर उन्हें पूरा करे।
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फोरलेन संयुक्त संघर्ष समिति ने सरकार से मांग की कि स्थानीय लोगों को रोजगार, विस्थापित दुकानदारों को उचित मुआवजा, रोड प्लान में बदलाव, टनल के कारण घरों का नुकसान का मुआवजा, पानी का रिसाव, जमीन का कटाव, प्रस्तावित बस स्टैंड के पास पैदल पथ या भूमिगत रास्ते बनाए जाने और पानी की निकासी के लिए भूमिगत पुल, स्कूलों व मंदिरों को पुनर्स्थापित किया जाए। उन्होंने मांग की कि किसानों की समस्या का तुरंत निपटारा करें, अन्यथा संघर्ष समिति आंदोलन के लिए मजबूर हो जाएगी जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य, केंद्र सरकार व राष्ट्रीय उच्चमार्ग के अधिकारियों की होगी।
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