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Bilaspur News: मटर की फसल में फलियां नहीं बनने से किसान चिंतित
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बुआई में देरी और तापमान में गिरावट से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका, लागत निकालना भी मुश्किल
संवाद न्यूज़ एजेंसी
रोहड़ू। शुरुआती दौर में सूखे के कारण मटर की बुआई में हुई देरी और अब तापमान में गिरावट ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। क्षेत्र में मटर की फसल में फूल आने के बावजूद कई खेतों में फलियां नहीं बनने की समस्या सामने आ रही है। इससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। किसानों को डर है कि यदि स्थिति ऐसी ही बनी रही तो बीज, खाद, सिंचाई और खेत की तैयारी पर किया गया खर्च निकालना भी मुश्किल हो जाएगा। क्षेत्र के किसान दिनेश ठाकुर ने बताया कि शुरुआती समय में पर्याप्त नमी नहीं होने के कारण खेतों में समय पर मटर की बुवाई नहीं हो सकी। बाद में बुआई होने से फसल के विकास पर असर पड़ा। अब फूल आने के दौरान तापमान में गिरावट से फलियां बनने की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है। किसान मन बहादुर के अनुसार, मौसम की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो पैदावार में गिरावट आ सकती है। पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नरेंद्र कायथ ने बताया कि मटर की फसल में फूल आने और फलियां बनने की अवस्था बेहद महत्वपूर्ण होती है। इस दौरान तापमान में उतार-चढ़ाव, मिट्टी में नमी की कमी या अधिकता और पोषक तत्वों का असंतुलन फूल झड़ने तथा फलियां बनने में बाधा पैदा कर सकता है। उन्होंने किसानों को खेतों में नमी का संतुलन बनाए रखने और जलभराव से बचने की सलाह दी। फसल में फूल झड़ने या फलियां नहीं बनने की समस्या दिखाई देने पर कृषि विशेषज्ञों से परामर्श लेकर ही उचित उपाय करने चाहिए। बिना विशेषज्ञ की सलाह के रसायनों का छिड़काव करने से बचना चाहिए, ताकि फसल को संभावित नुकसान से बचाया जा सके। किसान नारायण सिंह और रामप्रसाद ने बताया कि फसल प्रभावित होने से उनकी चिंता बढ़ गई है। खेती पर शुरुआती खर्च करने के बाद अब उत्पादन घटने का डर सता रहा है। यदि फसल में पर्याप्त फलियां नहीं बनीं तो किसानों के लिए लागत निकालना भी मुश्किल हो जाएगा।
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संवाद न्यूज़ एजेंसी
रोहड़ू। शुरुआती दौर में सूखे के कारण मटर की बुआई में हुई देरी और अब तापमान में गिरावट ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। क्षेत्र में मटर की फसल में फूल आने के बावजूद कई खेतों में फलियां नहीं बनने की समस्या सामने आ रही है। इससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। किसानों को डर है कि यदि स्थिति ऐसी ही बनी रही तो बीज, खाद, सिंचाई और खेत की तैयारी पर किया गया खर्च निकालना भी मुश्किल हो जाएगा। क्षेत्र के किसान दिनेश ठाकुर ने बताया कि शुरुआती समय में पर्याप्त नमी नहीं होने के कारण खेतों में समय पर मटर की बुवाई नहीं हो सकी। बाद में बुआई होने से फसल के विकास पर असर पड़ा। अब फूल आने के दौरान तापमान में गिरावट से फलियां बनने की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है। किसान मन बहादुर के अनुसार, मौसम की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो पैदावार में गिरावट आ सकती है। पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नरेंद्र कायथ ने बताया कि मटर की फसल में फूल आने और फलियां बनने की अवस्था बेहद महत्वपूर्ण होती है। इस दौरान तापमान में उतार-चढ़ाव, मिट्टी में नमी की कमी या अधिकता और पोषक तत्वों का असंतुलन फूल झड़ने तथा फलियां बनने में बाधा पैदा कर सकता है। उन्होंने किसानों को खेतों में नमी का संतुलन बनाए रखने और जलभराव से बचने की सलाह दी। फसल में फूल झड़ने या फलियां नहीं बनने की समस्या दिखाई देने पर कृषि विशेषज्ञों से परामर्श लेकर ही उचित उपाय करने चाहिए। बिना विशेषज्ञ की सलाह के रसायनों का छिड़काव करने से बचना चाहिए, ताकि फसल को संभावित नुकसान से बचाया जा सके। किसान नारायण सिंह और रामप्रसाद ने बताया कि फसल प्रभावित होने से उनकी चिंता बढ़ गई है। खेती पर शुरुआती खर्च करने के बाद अब उत्पादन घटने का डर सता रहा है। यदि फसल में पर्याप्त फलियां नहीं बनीं तो किसानों के लिए लागत निकालना भी मुश्किल हो जाएगा।