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Bilaspur News: छह स्कूलों में 225 बच्चों की आंखें जांचीं, 29 में मिला दृष्टि दोष

Sat, 12 Sep 2026 12:12 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 12 Sep 2026 12:12 AM IST
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Eyes of 225 children examined across six schools; vision defects found in 29.
मिशन दृष्टि को लेकर उपायुक्त कार्यालय में आयोजित बैठक में मौजूद अधिकारी। स्रोत: डीपीआरओ
जिले में मिशन दृष्टि के तहत 15 बच्चों में मायोपिया और 14 में हाइपरमेट्रोपिया की पुष्टि
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समय पर उपचार और फॉलोअप पर जोर

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। मिशन दृष्टि अभियान के तहत जिले में छोटे बच्चों की आंखों की जांच का अभियान आगे बढ़ाया जा रहा है। अब तक छह स्कूलों में तीन से आठ वर्ष आयु वर्ग के 225 बच्चों की आंखों की जांच की जा चुकी है। इनमें 29 बच्चों में दृष्टि संबंधी दोष पाए गए हैं। जांच में 15 बच्चों में मायोपिया (निकट दृष्टि दोष) और 14 बच्चों में हाइपरमेट्रोपिया (दूर दृष्टि दोष) सामने आया है।


शुक्रवार को उपायुक्त राहुल कुमार ने मिशन दृष्टि अभियान को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक कर इसकी प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य केवल बच्चों में दृष्टि दोष की पहचान करना नहीं है, बल्कि समय पर उपचार और नियमित फॉलोअप के माध्यम से उनकी आंखों की सेहत को बेहतर बनाना है। इसके लिए प्रत्येक बच्चे की जांच का डेटा तैयार किया जा रहा है, ताकि बीमारी की पहचान के बाद उपचार की स्थिति और फॉलोअप पर भी नजर रखी जा सके। दृष्टि संबंधी दोष पाए जाने वाले बच्चों के अभिभावकों को टीम की ओर से आवश्यक सलाह दी जा रही है। उन्हें 15 दिनों के भीतर नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में जाकर नेत्र रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेने और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार आवश्यक सुधारात्मक उपाय करवाने को कहा गया है। बच्चों को समय पर चश्मा उपलब्ध करवाने समेत अन्य उपचारात्मक कदम उठाए जाएंगे। उपायुक्त ने कहा कि छोटे बच्चों में दृष्टि संबंधी समस्या का असर केवल देखने की क्षमता तक सीमित नहीं रहता। आंखों की परेशानी के कारण सिरदर्द, किसी वस्तु पर ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और पढ़ाई के दौरान परेशानी हो सकती है। इससे बच्चों की एकाग्रता, सीखने की क्षमता और शैक्षणिक प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में कम उम्र में समस्या की पहचान कर उपचार शुरू करना जरूरी है। जिले में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीमें चारों ब्लॉकों में बच्चों की स्वास्थ्य जांच कर रही हैं। इन टीमों को आवश्यक उपकरण भी उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। सीएसआर और डीएमएफटी के सहयोग से ऑटो-रिफ्रैक्टोमीटर समेत अन्य उपकरण उपलब्ध करवाए गए हैं। इससे बच्चों की आंखों की प्रारंभिक जांच अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी। राहुल कुमार ने कहा कि मिशन दृष्टि को मिशन मोड में आगे बढ़ाया जा रहा है। पहले चरण में अधिक से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग कर दृष्टि संबंधी समस्याओं की पहचान और आवश्यक उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है। इसके बाद दूसरे चरण को भी जल्द शुरू किया जाएगा। इसमें बच्चों की आंखों की नियमित निगरानी और फॉलोअप व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। अभियान में विशेष रूप से सरकारी स्कूलों और ग्रामीण एवं दूरदराज क्षेत्रों के बच्चों तक नेत्र स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही निजी स्कूलों में भी मिशन दृष्टि के तहत बच्चों की आंखों की जांच की जाएगी। प्रशासन का लक्ष्य अधिक से अधिक बच्चों को स्क्रीनिंग के दायरे में लाकर समय रहते दृष्टि संबंधी समस्याओं का उपचार सुनिश्चित करना है। बैठक में सीएमओ बिलासपुर शशि दत्त, डीपीओ आईसीडीएस नरेंद्र कुमार, उप निदेशक प्रारंभिक स्कूल शिक्षा अरुण गौतम, नोडल अधिकारी उच्च शिक्षा स्कूल अनिल कुमार, सचिव जिला रेडक्रॉस अमित कुमार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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