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ऑनलाइन कक्षाओं की जमीनी हकीकत दावों से कोसों दूर

Mon, 07 Dec 2020 11:14 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 07 Dec 2020 11:14 PM IST
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बिलासपुर। कोविड-19 के दौरान ऑनलाइन शिक्षा में देश की राजधानी दिल्ली के बाद हिमाचल दूसरे स्थान पर है। लेकिन जिला बिलासपुर में दावे सिर्फ कागजों में ही दिखाई दे रहे हैं, जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है।
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हर घर पाठशाला की जमीनी हकीकत यह है कि सरकारी स्कूलों के बच्चों को शिक्षकों द्वारा हर घर पाठशाला पोर्टल के जरिये गृह कार्य और पाठ्य सामग्री भेज दी जाती है। बच्चे उस पाठ्य सामग्री से कुछ भी नहीं समझ पा रहे हैं। अधिकतर स्कूलों के अध्यापक मैसेज फारवर्ड करने के बाद बच्चों की सुध नहीं ले रहे हैं। इससे बच्चों को सिलेब्स को समझने में भारी परेशानी पेश आ रही है। छठी कक्षा से बारहवीं कक्षा तक के छात्रों को इन्हीं हालातों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं अभिभावकों को मजबूरन बोर्ड कक्षाओं के बच्चों को ट्यूशन के लिए भेजना पड़ रहा है। जिला के अधिकतर स्कूलों के अध्यापकों ने बच्चों को व्हाट्सऐप पर मैसेज फारवर्ड कर सिलेब्स तो पूरा कर दिया, लेकिन अगर बच्चों का वर्तमान में स्कूल बुलाकर टेस्ट लिया जाए तो वे परीक्षा में कुछ भी नहीं लिख पाएंगे।
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अधिकतर अभिभावकों का कहना है कि ऑनलाइन परीक्षाएं अधिकतर बच्चों ने नकल से दी। इससे अध्यापकों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जमीनी हकीकत तो यह है कि अध्यापकों द्वारा न ऑनलाइन कक्षाएं ली जा रही हैं और न ही बच्चों की समस्याओं का समाधान हो रहा है। ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान जिले में बच्चों से बात करने पर पता चला कि केवल 40 फीसदी अध्यापक ही ऑनलाइन कक्षाएं ले रहे हैं। लेकिन 60 फीसदी अध्यापक बच्चों के भविष्य को लेकर बिल्कुल चिंतित नहीं हैं। अध्यापकों की इस लापरवाही का खामियाजा बोर्ड कक्षाओं के बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।
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उच्च शिक्षा निदेशक राजकुमार ने कहा कि विभाग की ओर से हर रोज सभी स्कूलों से अपडेट ली जाती है। कोरोना के दौर में बच्चों की शिक्षा के लिए बहुत से प्रयास किए जा रहे हैं। कहा कि कुछ समस्याएं तो सामने आ रही हैं। कई बच्चों के पास तो इंटरनेट सुविधा तक नहीं है। अगर कहीं से यह शिकायत आती है कि अध्यापक अपनी जिम्मेवारी को अच्छे से नहीं निभा रहा है तो उस पर शिक्षा विभाग की ओर से कार्रवाई की जाएगी।
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