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बिना डाक्टर के बिलासपुर के दस पीएचसी
ब्यूरो/अमर उजाला, बिलासपुर
Updated Mon, 24 Aug 2015 12:21 AM IST
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बिलासपुर जिला में प्रदेश सरकार के बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावे पूरी तरह से फेल हो रहे हैं। इसका अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि जिला की दस पीएचसी बिना डॉक्टरों के चल रही है। पीएचसी में चिकित्सक न होने से फार्मासिस्ट डॉक्टरों की नब्ज टटोल रहे हैं।
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डॉक्टर न होने के कारण इन क्षेत्रों के लोगों को उपचार के लिए कई किलोमीटर दूर घुमारवीं और बिलासपुर जिला अस्पताल आना पड़ता है। हालांकि बिलासपुर के जिला अस्पताल में चिकित्सकों की कमी नहीं है। यहां 25 पदों की पर 28 डॉक्टर सेवाएं दे रहे हैं। लेकिन, प्राइमरी हेल्थ सेंटरों की हालत दयनीय बनी हुई है।
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सरकार ने इन क्षेत्रों में अस्पताल तो खोल दिए हैं लेकिन सुविधाएं मुहैया करवाने में पूरी तरह से नाकामयाब है। स्वारघाट, मलोखर और भाखड़ा जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों में भी चिकित्सक नहीं होने से मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। स्वारघाट नेशनल हाईवे पर सटा हुआ है।
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आए दिन यहां में सड़क हादसे होते हैं। लेकिन, बावजूद इसके यहां चिकित्सक की तैनाती नहीं की गई है। स्वारघाट में चिकित्सकों के दो पद स्वीकृत हैं। एक चिकित्सक कुछ समय पहले पीजी की ट्रेनिंग के लिए चला गया। इसके बाद आज तक यहां डॉक्टर की तैनाती नहीं की गई है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक नियमित पद नहीं होने से व्यवस्था चरमरा गई है।
बिलासपुर के पंजगाईं, हरलोग, मल्यावर, बागी-सुंगल, तल्याणा, रौड़ा, भपयार, नम्होल, स्वारघाट, मलोखर, भड़ेतर, तरसूह, भाखड़ा, सलोआ, गाह-घोरी और बैरी में चिकित्सक नहीं है। यहां पर फार्मासिस्ट ही तैनात है। जबकि सप्ताह में दो दिन नजदीकी अस्पताल में तैनात चिकित्सक यहां पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
विभाग के मुख्य चिकित्सा अधिकारी वीके चौधरी ने बताया कि चिकित्सकों की कमी के बारे आलाधिकारियों को सूचित किया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही समस्या का समाधान हो जाएगा। वहीं, विभाग के निदेशक डीएस गुरंग ने बताया कि राज्य में समय-समय पर चिकित्सकों की भर्ती हो रही है। सीएमओ को भी आदेश दिए गए हैं कि वह अपने स्तर पर इंटरव्यू लेकर पदों को भरें।